मकर संक्रांति का पर्व:थानेश्वर मंदिर में जल के साथ तिल, गुड़ व दही से अभिषेक किया

समस्तीपुर7 दिन पहले
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थानेश्वर मंदिर के बाहर दरिद्र नारायण को तिल, चूड़ा, लाई आदि दान करते श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
थानेश्वर मंदिर के बाहर दरिद्र नारायण को तिल, चूड़ा, लाई आदि दान करते श्रद्धालु।
  • मंदिर में सुबह छह बजे से ही जुटे श्रद्धालु, पूजा-अर्चना कर मनाई संक्रांति, दान कर कमाया पुण्य

पूजा-अराधना व दान के महत्व से जुड़े मकर संक्रांति पर्व के दिन लोगों ने मंदिरों में दान कर पुण्य कमाया। इसको लेकर शुक्रवार को शहर के थानेश्वर स्थान मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। श्रद्धालुओं ने जल के साथ ही तिल, गुड़ व दही से बाबा का अभिषेक किया। हालांकि कोरोना को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को नहीं मिली। सभी जल पात्र में भांग, फूल, धतूरा व दूध के साथ गुड़ व तिल से भी बाबा का जलाभिषेक कर रहे थे। मंदिर के मुख्य पुजारी संजय बाबा ने बताया कि कोरोना को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ कम रही। लोग सुबह 6 बजे से ही मंदिर में आने शुरू हो गए। भक्तों ने भगवान का जलाभिषेक कर गुड़, तिल व दही-चूड़े का भोग भी लगाया। वहीं घर जाकर लोगों ने दही-चूड़ा, तिलवा व लाई खाई। दूसरी ओर कितने ही लोगों ने अपने संबंधियों के यहां भी दही-चूड़ा व तिलकुट पहुंचाया।
{चूड़ा-तिल व कपड़े का दान कर मनाई संक्रांति : मंदिर परिसर व उसके बाहर बैठे दरिद्र नारायण को श्रद्धालुओं ने चूड़ा-तिल व कपड़े का दान कर संक्रांति मनाई। जितने भी श्रद्धालु मंदिर आए सभी ने अपनी ओर से कुछ न कुछ दान दिया। किसी ने चूड़ा, तिल, लाई, गुड़, चावल तो किसी ने पैसा व कपड़े दान दिए। लोगों ने पुण्य के लिए अपने बच्चों के हाथों से दान दिलाया।
{ठंड के माह तक खाते हैं दान में मिला चूड़ा : वहीं थानेश्वर मंदिर में दान लेने को जुटे जरुरतमंद परिवारों ने बताया कि यहां से मिले दान को हम सभी ठंड भर खाते हैं। वहीं ननकी, सीपन व भगीरथ आदि ने बताया कि संक्रांति पर 50-70 किलो चूड़ा, मूढ़ी आदि दान मिलता है। ठंड में जब हम भिक्षाटन को लेकर बाहर नहीं जा पाते तो परिवार का काम इसी चलता है।

हर्षोल्लास के साथ मनाई गई मकर संक्रांति

हर्षोल्लास के साथ शुक्रवार को पुरानी परंपरा के अनुसार ही लोगों ने चावल की ढेरी लगाई। दर्जनों पंडित को खिचड़ी के चावल दान किए। गांव के अरुण कुमार चौधरी बताते हैं कि काफी वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। आज भी हम सब इसका जिम्मेदारी पूर्वक निर्वाह करते आ रहे हैं। वहीं पंडित मनी झा बताते हैं कि आज के इस युग में लोग भौतिक सुख को प्रधानता दे पुरानी परंपराओं को भूलते जा रहे हैं। मकर संक्रांति के दिन चावल दान करने की परंपरा यजमान व पंडित के प्रेम को दर्शाता है। जानकारी के अनुसार पतैली गांव के लोग आज भी अपने परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं। लोग मकर संक्रांति के दिन टोले के प्रत्येक घरों से चावल इक्कठा कर ठाकुरबाड़ी पर जमा करते हैं। फिर चावल की ढेरी लगाई जाती है। बाद दोपहर के समय से पतैली व बेलारी गांव के पंडितों को यह दान किए जाते हैं। लोहागीर गांव के बाबा बोधबली, चंदौली के ठुठा महादेव सहित अन्य देवी देवताओं के देवालयों में मकर संक्रांति के अवसर पर लोगों ने पूजा अर्चना की। लोगों ने अपने-अपने घरों में पंडितो को अन्न, तिल के बने सामान आदि दान किए।

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