आस्था:खरमास धार्मिक अनुष्ठान के लिए उत्तम मास, भगवान विष्णु और सूर्य देव की उपासना लाभदायक हाेगी

समस्तीपुरएक महीने पहले
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  • 16 दिसम्बर, त्रयोदशी कोे दिन में 12:10 बजे सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास प्रारंभ हो जाएगा

वर्ष में दो महीने खरमास के नाम से जाने जाते हैं। जब एक महीने सूर्य धनु राशि में (दिसम्बर-जनवरी) तथा एक महीने मीन राशि में (मार्च - अप्रैल) रहते हैं। इस दो महीने की अवधि को खरमास कहते हैं। खर का अर्थ होता है अमंगलकारी। धनु और मीन राशि के स्वामी देवगुरु वृहस्पति होते हैं। सूर्य जब इन राशियों में होते हैं तो परस्पर तेज में क्षीणता आती है जिसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि खरमास में कोई भी शुभ संस्कार कृत्य नहीं होते। खरमास में किए जाने वाले ऐसे कार्य मंगलकारी नहीं होते।

ये जानकारी भागवताचार्य पण्डित श्रीविजयशंकर झा देते हुए बताया कि खरमास - धार्मिक अनुष्ठान के लिए उत्तम मास है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 16 दिसम्बर 2021, त्रयोदशी -गुरुवार के दिन में 12:10 बजे सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास प्रारंभ हो जाएगा। यह अवधि 14 जनवरी 2022 तक है। इसी दिन पौष शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि- शुक्रवार की रात्रि 7:17 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास समाप्त हो जाएगा। विवाह आदि शुभ संस्कार कृत्य आरंभ हो जायेगा। खरमास धार्मिक अनुष्ठान के लिए उत्तम माना जाता है। इसी कारण खरमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। सूर्य और देवगुरु बृहस्पति के एक साथ होने से भगवान सूर्य और विष्णु की आराधना बहुत ही कल्याणकारी होती है।

पण्डित श्रीविजयशंकर झा के अनुसार खरमास में तीर्थाटन का विशेष महत्व है

टभका, विभूतिपुर के रहने वाले भागवताचार्य पण्डित श्रीविजयशंकर झा खरमास में नित्य किये जानेवाले धार्मिक कार्य वर्जित नहीं हैं। खरमास में सूर्य, बृहस्पति और लक्ष्मीनारायण की आराधना तथा तीर्थाटन का विशेष महत्व है। इस अवधि में सूर्योदय से पूर्व स्नान कर उगते हुये किरणयुक्त सूर्य को अर्घ दें। इससे आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। अधिक से अधिक गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। भागवतकथा और विष्णुसहस्र नाम का पाठ या श्रवण करना चाहिए। तुलसी और पीपल के लिए दीपदान और पूजा-परिक्रमा करनी चाहिए। खरमास की एकादशी-व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत रखना चाहिए। खरमास में गौसेवा और दान-पुण्य का कई गुणा अधिक लाभ होता है।

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