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किसानों को होगा फायदा:ईख में कल्ला निकलने के दौरान उसका उचित प्रबंधन करके किसान कर सकते हैं बेहतर उत्पादन और लाभ

समस्तीपुर5 महीने पहले
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बिहार में सामान्यतः 80 प्रतिशत ईख की रोपाई बसंतकालीन रोप यानी फरवरी और मार्च के महीने में किया जाता है। ईख फसल की बढ़ती हुई स्थिति को चार अवस्थाओं में बांटा गया है। ईख रोप के बाद प्रथम दो महीनों की अवस्था पौधों के जमाव की होती है। रोप के 60 दिनों से 150 दिनों तक का समय ईख में कल्ला निकलने का होता है। इसके अलावा 150 से 240 दिनों तक का समय गैंड ग्रोथ यानी अत्यधिक बढ़वार एवं 240 से 360 दिनों तक का समय परिपक्वता का समय होता है।

कल्ला निकलने के दौरान किसान ईख फसल का उचित और वैज्ञानिक प्रबंधन करके अच्छी पैदावार और बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। ये बातें डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा के ईख अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. डीएन कामत ने कहीं। उन्होंने किसानों को ईख फसल के प्रबंधन से जुड़े सुझाव देते हुए कहा की वर्तमान समय ईख के फसलों में कल्ला निकलने का समय है। ऐसी स्थिति में किसानों के लिए ईख के खेत में उचित नमी बनाएं रखने के अलावे खेतों से खरपतवार हटाकर प्रत्येक सिंचाई के उपरांत खेत में निकौनी कराना अतिआवश्यक है।

उन्होंने कहा कि 1 हेक्टेयर खेत में अगर कटाई के समय औसतन 1 किलो वजन का 1 से डेढ़ लाख ईख का पौधा निकलता है तो वह 100 से 150 टन प्रति हेक्टेयर का उपज माना जाएगा जो ईख उत्पादन में बेहतर उपज माना जाता है। उन्होंने कहा कि बेहतर उपज के लिए ईख के खेत में पर्याप्त कल्लो का होना अति आवश्यक होता है। एक हेक्टेयर खेत में 40 हजार ईख के गुल्ली की रोपाई की जाती है। प्रत्येक गुल्लियों में 3 आंख होते है। इस तरह अधिक से अधिक आंख ही पौधे बनकर उपज को बढ़ाने का काम करते है।

उन्होंने बताया कि ईख में कल्ले निकलने की अवस्था काफी क्रिटिकल अवस्था मानी जाती है। इस अवस्था में ईख उत्पादन से जुड़े किसानों को विशेष जागरूक रहने की जरूरत होती है। इस अवस्था में नमी की कमी होने पर ईख के फसल में जर छिद्रक, कल्ला छिद्रक, शीर्ष छिद्रक एवं कलिका रोग के प्रकोप होने की भी काफी संभावना बनी रहती है। उन्होंने बताया कि ईख का ऐसा प्रभेद जिसमें कम कल्ला निकलता हैं जैसे बीओ 139 एवं को 0238 ऐसे प्रभेदों में किसानों को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। इसके अलावे अधिक कल्ले निकलने वाले प्रभेद जैसे कोपू 9301, कोपु 2061, बीओ 153, कोलख 94184 एवं राजेंद्र ईख में किसान अधिक कल्ले को रोकने हेतु समय से पहले मिट्टी चढ़ाने का कार्य करें।

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