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आपदा:बाढ़ से जूझ रहे लोगों के सामने अब भोजन, पानी का संकट, किसानों को पशुओं के चारे की सता रही है चिंता

समस्तीपुर19 दिन पहले
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सिंघिया में जान जोखिम में डाल दैनिक कार्य के लिए गांव से बाहर निकलता युवक।   - Dainik Bhaskar
सिंघिया में जान जोखिम में डाल दैनिक कार्य के लिए गांव से बाहर निकलता युवक।  
  • दो दिनों से बाढ़ का पानी स्थिर रहने के बाद भी पानी घटने की प्रवृति शुरू नहीं हुई है, जस-की-तस बनी हुई है समस्या

प्रखंड क्षेत्र में दो दिनों से बाढ़ का पानी स्थिर रहने के बाद भी पानी घटने की प्रवृति शुरू नहीं हुई है। इसके कारण प्रखंड क्षेत्र के महरा, कुंडल टू, क्योंटहर, सालेपुर, बिष्णुपुर डीहा, हरदिया, बंगरहट्टा, निरपुर भररिया, वारी पंचायत में बाढ़ की स्थिति जस की तस बानी हुई है। प्रखंड क्षेत्र होकर बहने वाली कमला व जीवछ नदी की जल स्तर विगत दो दिनों से स्थिर बनी हुई है। वही क्षेत्र होकर बहने वाली करेह नदी खतरे की निशान से ऊपर बह रही है। इसके कारण प्रखंड क्षेत्र के प्रभवित टोले मोहल्ले में बाढ़ पड़ितों की परेशानी यथावत बनी हुई है।

बाढ़ के पानी के बीच बीच घिरे पनशल्ला, बंगठैया, कंजारा, लक्ष्मीनियां, सोनमणि, कविलाशी, नवटोलिया, बिषहरिया, मुशहरनिया, जीबुडिहुली, भव्वे, मरवा, न्यौरी, अर्रही, मुसेपुर, बलहा, अगरौल मुशहरी, दोरकहि, करही, सोनसा, डीहा कॉलनी, थरघट्टा, वलाट, जमुआ मुशहरी, पैनपीवी, सुहाग डीह, वस्ती मुशहरी, मिल्की राम टोला के बाढ़ पीड़ितों की स्थति गंभीर बनी हुई है। बाढ़ की पानी में इन गांव तक जाने वाली सड़क डूबी हुई है। घरो व शौचालय में पानी घुसा हुआ है। ऊंचे स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूरी बना हुआ है। इसके कारण पीड़ितों की हालत दयनीय बनी हुई है।
किसानों के भूसा घर में घुसा पानी
बाढ़ की विकट परिस्थिति से जूझ रहे पीड़ितों के सामने पशुचारा को लेकर समस्या उत्पन्न है। इन टोले के अधिकतर परिवारों का भूसा घर पानी की चपेट में आ गया है। इसके कारण भूसा बर्वाद हो चुकी है। इसके कारण पशुओं का पेट भरना किसानों के लिए समस्या बनी हुई है। बाढ़ के कारण क्षेत्र में हरी घास भी नहीं मिल रही है। इसके कारण किसान 20 किलोमीटर दूरी तय कर रोसड़ा, हसनपुर, शिवजीनगर के साथ दरभंगा जिला के बहेड़ी व बिरौल प्रखंड जाकर हरे चारे की व्यवस्था करनी पड़ती है। इन सबके बीच प्रशासन बाढ़ प्रभवितों की भोजन, पानी, पशुचारा के साथ अन्य सहायता मुहैया करवाने के दिशा में अब तक मौन बने हुए है। इनकी मूलभूत कमियां भी दूर नहीं की जा रही है।

बाढ़ की स्थिति सामान्य, फिर भी घर जाने से परहेज कर रहे बाढ़ पीड़ित

करेह नदी की पेटी में बसे सिरसिया गांव में बाढ़ की स्थिति अब सामान्य है। घरों व मोहल्ले से बाढ़ का पानी निकल चुका है। अब बस गलियों व सड़कों पर ही पानी जमा है। कुल मिलाकर पिछले दो महीने के बाद सिरसिया गांव के लोग बाढ़ की समस्या से धीरे-धीरे उबरने लगे हैं। फिर भी लोगों में भय का माहौल कायम है। घरों से पानी निकलने के बाद भी बाढ़ पीड़ित परिवार अपने घरों में लौटने से परहेज कर रहे हैं। कारण यह कि दलदली के कारण घरों के ध्वस्त होने का भय बना हुआ है। दलदली के कारण कई घर ध्वस्त भी हो चुके हैं। इस कारण बाढ़ से राहत मिलने के बाद भी लोग बेघर होने को विवश हैं। बताया जाता है कि भटवन पंचायत का सिरसिया गांव करेह नदी की पेटी में बसा हुआ है। प्रत्येक साल जुलाई-अगस्त से लेकर सितंबर अक्टूबर तक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से यह गांव बाढ़ की चपेट में आ जाता है। इस साल भी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण पिछले दो महीने से सिरसिया गांव बाढ़ की चपेट में था।

निचले इलाके में है जलजमाव | हालांकि नदी के जलस्तर में कमी आने से अब गांव से बाढ़ का पानी बाहर निकल चुका है। हालांकि निचले हिस्से में अभी भी जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। लोगों को एक मोहल्ला से दूसरे मोहल्ले तक जाने में परेशानी होती है। एक तरफ घरों के ध्वस्त होने का डर बना हुआ है, तो दूसरी तरफ जलजनित बिमारियों के फैलने का भी भय बना है। कुल मिलाकर भले ही सिरसिया गांव से बाढ़ का पानी निकल चुका है, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है। कभी कभी बारिश समस्या बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ता।

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