परेशानी / 35 वर्षों से श्रीपुरगाहर में बनी पानी टंकी से नहीं होती पानी की सप्लाई, बूंद-बूंद को तरस रहे लोग

For 35 years, water in Sripurgarh has not been supplied by water tank, people are craving drop by drop
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For 35 years, water in Sripurgarh has not been supplied by water tank, people are craving drop by drop

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

समस्तीपुर. प्रखंड के श्रीपुरगाहर गांव में विगत 35 वर्ष पूर्व बना जलमीनार से आज तक लोगों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुई है। पिछले 35 वर्षों से एक जलमीनार केवल शोभा की वस्तु बनकर खड़ी है। आश्चर्य है कि इतने वर्षों के बाद भी लाखों की लागत से बना जलमीनार का लाभ लोगों को नहीं मिल पाना सरकार व विभाग की उदासीनता को दर्शाता है। इस उमस भरी गर्मी में शुद्ध पेयजल के लिए लालायित स्थानीय लोगों में आक्रोश पनपने लगा है। फिलवक्त तीन दशक से जलापूर्ति की आशा में लोग आज भी दिन गिन रहे हैं कि यह कब चालू होगा।

एक ओर सरकार द्वारा गांव में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए नल-जल योजना को युद्धस्तर पर मूर्त रूप देने की कोशिश की जा रही है, जिसमें सरकार के करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।दूसरी तरफ पूर्व की व्यवस्था में लाखों की खर्च के बाद भी लोगों को पानी की बूंद नसीब नहीं हो रहा है। पुरानी व्यवस्था के ठप रहने से जनभावनाओं के साथ लोग ये खिलवाड़ मान रहे हैं। हर वर्ष पाइप की मरम्मतीकरण के नाम पर खानापूरी कर छोड़ दिया जाता है। जब विभाग से जानकारी ली जाती है तो बहुत जल्द चालू हो जाएगा कहकर अपना पल्ला झाड़ते नजर आते हैं।

कई गांव में बिछाई गई है पाइप लाइन, तकनीकी गड़बड़ी के कारण व्यवस्था में सुधार नहीं

बताया गया कि गांव के श्रीपुरगाहर, सिहुली, गुदारघाट, अमरौती, शिवनगर, मुजारी आदि गांव में पाइप लाइन बिछाई गई। जगह-जगह पानी स्टॉक के लिए टैंक भी बनाया गया, लेकिन अब वह भी जर्जर की स्थिति में है। लोगों की माने तो पाइप उल्टा बिछा दिया गया है। और उसे सील भी नहीं किया गया। इस कारण जब भी चेक करने के लिए चालू की जाती है पानी सड़क पर बहने लगता है।बताया गया कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण व्यवस्था में सुधार नहीं हो रही है। और आपरेटर को वेतन के नाम पर मोटी रकम मिलती होगी।

बताया गया कि स्थानीय विधायक अशोक कुमार मुन्ना  द्वारा भी विधानसभा में इस मुद्दे को जोर-शोर से एक बार उठाया गया था। विभाग  द्वारा इसे जल्द चालू करने का आश्वासन भी दिया गया था। आश्वासन आज भी ठंडे बस्ते में दबी है। सूत्रों की माने तो तकनीकी गड़बड़ी के कारण समस्या बनी है। पाइप, बोरिंग सभी जर्जर अवस्था मे पहुंच गया है। हर साल मरम्मती के नाम पर जनता ठगे जा रहे हैं। आज भी पानी की किल्लत से लोग परेशान हैं।

वर्ष 1985 में बनी थी पानी टंकी, लोगों को लाभ नहीं

जानकारी के अनुसार वर्ष 1985 में तत्कालीन विधायक रामसेवक हजारी के कार्यकाल में जलमीनार का निर्माण हुआ था। इसके बाद तत्कालीन पीएचईडी मंत्री डॉ प्रेम कुमार के द्वारा उद्घाटन भी किया गया था। तब से आजतक लोगों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ है। स्थानीय पंसस सह पूर्व उपप्रमुख हेमंत कुमार सिंह ने कहा कि हर एक दो साल पर पाइप लाइन की मरम्मती के नाम पर पाइप का उखाड़ गाड़ किया जाता है। लेकिन फिर भी व्यवस्था नहीं सुधरती है। मरम्मती के नाम पर खानापूरी कर राशि का दुरुपयोग किया जाता है। पंसस की बैठक में भी इसकी जांच कर इसे चालू करवाने का प्रस्ताव कई बार पारित हो चुकी है। लेकिन आजतक कुछ नहीं हुआ।उन्होंने बताया कि विभाग व सरकार की उदासीनता की वजह से लाखों रुपए खर्च के बाद भी लोगों को शुद्ध पानी उक्त जलमीनार से नसीब नहीं हुआ है।

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