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एलएनएमयू:देश की आत्मा, राष्ट्रीय अस्मिता और जन-जन के स्वाभिमान की भाषा है हिंदी : प्रो. राजेन्द्र साह

समस्तीपुर13 दिन पहले
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  • पीजी हिंदी विभाग में हिंदी दिवस पर राजभाषा हिंदी की वर्तमान दशा एवं दिशा पर हुई संगोष्ठी

एलएनएमयू के पीजी हिंदी विभाग में हिंदी दिवस पर भाषण प्रतियोगिता और राजभाषा हिंदी की वर्तमान दशा एवं दिशा पर मंगलवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. राजेन्द्र साह ने कहा कि हिंदी भारत की आत्मा है। यह राष्ट्रीय अस्मिता एवं देश के स्वाभिमान की भाषा है। यह जन-जन की भाषा है। एक- दूसरे को जोड़ने की समर्थ भाषा है। राजभाषा और राष्ट्रभाषा के बीच गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में काम करने की एक पद्धति बनी हुई है। इसे बदलना होगा। पूर्व डीएसडब्ल्यू डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने कहा कि हमलोग हिंदी को जी रहे हैं, हिंदी की रोटी खा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जो लोग विदेशों में हिंदी को जी रहे हैं, असलियत में हिंदी उन्हीं में जी रही है। खड़ी बोली हिंदी की जब हम बात करते हैं तो हिंदी को भूल जाते हैं। संस्कृत को सभी भाषाओं के ऊपर नहीं लादा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी के समक्ष जो सबसे बड़ी चुनौती है वह संस्कृत की चाबुक और अंग्रेजी का रानी बने रहना है। सह प्राचार्य डॉ. आनंद प्रकाश गुप्ता ने राजभाषा हिंदी के मार्ग में आने वाली चुनौतियों को क्रमवार और तथ्यात्मक ढंग से सामने रखा। राजभाषा हिंदी को लेकर जो ऐतिहासिक विवाद चला उस पर भी उन्होंने समग्र रूप से प्रकाश डाला।

प्रेम, विद्रोह और संघर्षों की भाषा है हिंदी : डॉ. अखिलेश कुमार

हिंदी विभाग के सहायक प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार ने कहा कि राजभाषा हिंदी को अंग्रेजी में फंक्शनल हिंदी कहते हैं। हिंदी प्रेम, विद्रोह और संघर्षों की भाषा है। उर्दू मिश्रित हिंदी को हिंदुस्तानी के रूप में जाना जाता था। हिंदी और अंग्रेजी को लेकर जो विवाद हुआ वह मूल रूप से उत्तर और दक्षिण का विवाद है। आज तक हिंदी को वह स्थान नहीं हासिल हुआ जिसकी वह हकदार थी। अटल बिहारी वाजपेयी ने सर्वप्रथम संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण दिया। आज हिंदी का निश्चित रूप से विकास हुआ है। राजनीतिक वैमनस्य की वजह से हिंदी राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित नहीं हो सकी है।

अखिलेश कुमार राठौर ने कहा कि मुख का आभूषण आमजन की वाणी है हिंदी। चंद्रशेखर आजाद ने हिंदी को जनमानस की भाषा बताया। शोध प्रज्ञ कृष्णा अनुराग, धर्मेंद्र दास आदि ने विचार रखे। निबंध एवं भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। निबंध प्रतियोगिता में स्नेहा कुमारी (पीजी हिंदी) ने प्रथम स्थान, मिश्रा सपना संजीत (पीजी हिंदी) और अनीश (पीजी हिंदी) ने क्रमशः द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान आलिया अजीमा (पीजी अंग्रेजी), द्वितीय स्थान स्नेहा कुमारी(पीजी हिंदी) को प्राप्त हुआ।

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