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कोरोना का कहर:सरकारी अनुदान के अभाव में संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक भुखमरी की कगार पर, नहीं मिल रही है मदद

समस्तीपुर2 महीने पहले
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  • करीब 1500 शिक्षक व शिक्षकतर कर्मचारी अनुदान की अपेक्षा करते हुए काम करते रहे हैं

जिला स्थित संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक व कर्मचारी भुखमरी के कगार पर हैं। इन वित्तरहित शैक्षणिक संस्थानों को वर्षों से सरकारी अनुदान नहीं मिल पाने और स्थानीय गड़बड़ियों के कारण यहां के शिक्षकों व कर्मचारियों को कोई पेमेंट नहीं किया जा रहा है। कोविड-19 के कारण भी यहां के शिक्षक कुछ और जतन कर अपना परिवार चला पाने की स्थिति में नहीं हैं। समस्तीपुर में आठ संबद्ध वित्तरहित डिग्री तथा 28 इंटर स्तरीय महाविद्यालय हैं। करीब 1500 शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारी अनुदान की अपेक्षा करते हुए काम करते रहे हैं। लेकिन विगत छह वर्षों से अनुदान प्राप्त नहीं होने और इन महाविद्यालयों के प्रबंध समितियों की बेरूखी के कारण इन्हें कोई भी वित्तीय मदद नहीं दी जा रही है।

सृजीत पद पर कोई शिक्षक काम कर रहा हो या असृजीत पद पर, किसी को कोई राशि नहीं मिल रही है। संत कबीर इंटरमीडिएट महाविद्यालय से सेवानिवृत्त होने वाले और जिला स्थित वित्तरहित संघर्ष मोर्चा को अबतक नेतृत्व दे रहे प्रो. उमेश कुमार ने बताया कि सरकारी अनुदान के फलस्वरूप उन्हें प्रति माह औसतन 5000 रुपए मिल जाते थे।  लेकिन विगत छह वर्षों की राशि उन्हें अभी तक सरकारी अनुदान के नहीं मिलने के कारण नहीं मिल पाई है।

उन्होंने बताया कि स्नातक स्तरीय संत कबीर महाविद्यालय की स्थिति यह है कि महाविद्यालय को वर्ष 2010 में प्राप्त राशि जो 1 करोड़ 28 लाख है, आजतक स्थानीय विवाद के कारण शिक्षकों व कर्मचारियों के बीच नहीं बांटी जा सकी है। प्रो. उमेश कुमार के अलावा प्रो. वेदनारायण राय, प्रो. रामशंकर शर्मा सहित कई अन्य शिक्षकों ने कहा कि बार-बार जांच के नाम पर सरकारी अनुदान रोक दिया जाता है। एक बार फिर से तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है।

इससे लाखों छात्र छात्राओं को शिक्षा की सुविधा प्रदान करने वाले शिक्षकों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। एआईफुक्टो महासचिव प्रो. अरुण कुमार तथा भूतपूर्व विधान पार्षद प्रो. विनोद चौधरी ने कहा कि संबद्ध महाविद्यालयों को अनुदान देने की सरकार की मनसा नहीं है। जांच के नाम पर अनुदान को फिर से लटकाया जा रहा है। सरकार ने एक बार फिर से संबद्ध महाविद्यालयों की जांच का निर्णय लिया है। जांच के नाम पर अनुदान रोके जाने से अभावग्रस्त शिक्षक आज भुखमरी के कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि जांच की प्रक्रिया जो भी हो, शिक्षकों को राहत दी जानी चाहिए और अनुदान की राशि शीघ्र निर्गत की जानी चाहिए।

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