किसानों की बढ़ी परेशानी / कमला नदी के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी के कारण मखाना के फसल की बर्बाद होने की बढ़ी आशंका

Increase in water level of Kamla river due to increased possibility of Makhana crop ruin
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Increase in water level of Kamla river due to increased possibility of Makhana crop ruin

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

समस्तीपुर. प्रखंड क्षेत्र होकर गुजरने वाली कमला नदी की जलस्तर हो रही के कारण इस नदी में पचास से अधिक एकड़ में लगाई गई मखाना की फसल पर बर्बादी होने का खतरा मंडराने लगा है। फसल में फल तैयार होने से पूर्व नदियों की जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी के कारण किसानों को नदियों के तेज धारा के साथ फसल बहने की चिंता सताने लगा है। बताया गया कि अन्य सालों की भांति इस बार भी वारी, पीपड़ा, जगना, हरदिया, बांगरहट्टा, शुंभा आदि के मधुआरें द्वारा नदी के गहरे भाग में मखाना की फसल लगाया गया है।

किसानों की माने तो विगत वर्षों के भाती इस साल मौसम फसल के अनकूल है। समय - समय पर हो रही बारिश से किसानों को एक ओर पटवन की बचत हुई। वहीं दूसरी ओर फसल की उपज अधिक होने की उम्मीद है। लेकिन इस बार फसल तैयार होने से पूर्व बढ़ रही जलस्तर के कारन पानी की तेज धार में फसल बहने व बर्बाद होने का खतरा मंडराने लगा है। वारी गांव के सरपंच मछुआ संघ के सदस्य राजकुमार मुखिया, किसान सुधीर मुखिया, जालिम, महादेव, रामबहादुर, गणेशी, खलीफन मुखिया ने बताया कि मखाने की फसल लगाने के लिए पानी का स्थिर होना अनिवार्य है। दिसंबर से जनवरी के बीच पतवाड़ को साफ कर फसल लयाया जाता है। अप्रैल से जून के बीच पानी के सतह से ऊपर फूल लगते है।

पानी के भीतर जून से जुलाई महीने में फल तैयार होते है धीरे धीरे फल कोके से निकल कर 24 से 48 घंटा तक पानी के ऊपर तैरते रहता है। इसके उपरांत फल निचले तल में जमा हो जाता है। दो महीने तक फसल पानी में पूरी तरह से गलने के बाद सितंबर व अक्टूबर महीने में पानी के तले से बटोर कर निकला जाता है। बताया गया कि नदी के तल उथले होने के कारण बरसात आते ही नदी में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। और अन्य मौसम में सुख जाती है। पानी सूखते ही नदी में मछली की आमद बंद हो जाती। इसके बाद नदी के गहरे तले में जगह - जगह माखना की खेती कर किसान आर्थिक भरपाई के साथ जीविका उपार्जन करते है। लेकिन इस बार फसल में अभी फूल ही लगे है। ऐसे में अगर नदी में पानी की बढ़ोतरी रहा तो तेज धारा में फल बहने के साथ फसल बर्बाद होने की संभावना बनी हुई है।

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