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पहल:मास्क उत्पादन कर जीविका दीदियों ने मिसाल पेश की, भुगतान नहीं होने से बढ़ी लोगों की परेशानी

समस्तीपुर12 दिन पहले
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मास्क का निर्माण करती जीविका दीदी। - Dainik Bhaskar
मास्क का निर्माण करती जीविका दीदी।
  • जिले के 35 केंद्रों पर 1263 जीविका दीदी मास्क उत्पादन में लगी है, करीब दो लाख मास्क का कर चुकी है उत्पादन, प्रखंडों में भुगतान को लेकर दिलचस्पी नहीं
  • लगभग सभी मास्क पंचायती राज विभाग को की जा चुकी है आपूर्ति

जीविका दीदियों ने कोरोना काल के इस मुश्किल समय में महामारी को मात देने के लिए बड़े पैमाने पर मास्क कर निर्माण कर रही है। पंचायती राज विभाग के माध्यम से मास्क की आपूर्ति भी दी गई है लेकिन भुगतान नहीं होने से मास्क के निर्माण पर ब्रेक लग सकता है।

जानकारी अनुसार जिले में 35 केन्द्रों पर 1263 दीदियां मास्क उत्पादन में लगी है। कच्चा माल की उपलब्धता से लेकर मास्क उत्पादन व उसके विपणन का सारा कार्य दीदियां ही संभाल रही हैं। जीविका दीदियां न केवल लोगों की जान बचाने में अहम योगदान दे रही हैं बल्कि रोजगार के साधन भी उपलब्ध कराने में सफल रही हैं। जीविका दीदियों ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अब तक 1964839 मास्क का निर्माण किया है। जबकि दीदियों के पास मास्क बनाने का कुल 1941857 का आदेश पंचायती राज संस्थाओं से प्राप्त हुआ है। पंचायती राज संस्थाओं को अब तक 1774212 मास्क की आपूर्ति की जा चुकी है। पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रो में बिहार सरकार की ओर से मास्क का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है इसलिए विभाग की ओर से मास्क की ज्यादा मांग है। इसके अलावे भी जिले के अन्य विभाग यथा मनरेगा, स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग आदि द्वारा भी अबतक दीदियों द्वारा बनाए गए 1154100 मास्क की खरीद की गयी है और दीदियों के कार्यों को सराहा है।

15 रुपए है मास्क का रेट

दीदियों द्वारा उत्पादित मास्क कॉटन का व दो लेयर का है। यह मास्क महज 15 रुपये में सरकारी से लेकर गैर सरकारी कार्यालयों द्वारा खरीदे जा रहे हैं। ये मास्क ना सिर्फ सस्ते हैं बल्कि कॉटन से बने होने के कारण इनमें सांस लेने में भी कोई परेशानी नहीं होती तथा यह पूरी तरह उपयोगी है। हालांकि दीदियों द्वारा बिक्री की गयी मास्क की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। भुगतान में अनावश्यक बिलंब के कारण दीदियों में निराशा। जिले में एक दो प्रखंडों के द्वारा भुगतान की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। लेकिन अधिकांश प्रखंडों में भुगतान को लेकर सक्रियता नहीं दिखाई जा रही है। जिससे मास्क उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

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