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उद्घाटन:तीन साल से बंद जूट मिल हुआ चालू; 4 हजार मजदूराें के परिवारों के चेहरे पर लाैटी मुस्कान

समस्तीपुर6 दिन पहले
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  • उद्योग मंत्री महेश्वर हजारी ने भागीरथपुर पंचायत स्थित रामेश्वर जूट मिल का सायरन बजाकर किया उद्घाटन

प्रखंड क्षेत्र की भागीरथपुर पंचायत में स्थित रामेश्वर जूट मिल में रविवार को नजारा बदला-बदला सा दिखा। हजारों की संख्या में लोग सुबह से ही यहां जुटने लगे थे। पिछले कई वर्षों से बंद पड़े मिल के खुलने की खुशी वहां के कर्मियों के चेहरे पर साफ झलक रही थी। स्थानीय विधायक सह योजना विकास मंत्री महेश्वर हजारी के उद्याेग मंत्री बनने के बाद यह संभव हो सका है। इसको लेकर मंत्री ने स्वयं उपस्थित होकर मिल का सायरन बजाकर शुभारंभ किया। इसके बाद मिल चालू किया गया।

इस दौरान मंत्री ने कहा कि मिल बंद होने से क्षेत्र के मजदूर सहित काम कर रहे करीब 4 हजार मजदूर परिवार का निवाला छिन गया था। काफी प्रयास के बाद मिल को चालू किया गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों के कानों तक मिल के सायरन की आवाज पहुंचाना ही हमारा लक्ष्य था। इससे यहां से जुड़े हाथों को काम व मुंह को निवाला मिल सकेगा। मौके पर डीएम शशांक शुभंकर, बीडीओ धर्मवीर कुमार प्रभाकर, सीओ अभय पद दास, विजय शर्मा, मुकेश कुमार सिंह, जदयू नेता अशोक दास, भोला राय, मजदूर यूनियन नेता अमरनाथ सिंह, मोहम्मद नौशाद आलम, लालबाबू राय सहित आदि लोग शामिल थे।

क्षेत्र के लोगों के कानों तक जूट मिल के सायरन की आवाज पहुंचाना ही हमारा लक्ष्य था, इससे यहां से जुड़े हाथों को काम आैर मुंह को निवाला मिल सकेगा : उद्योग मंत्री

दरभंगा महाराज ने 1936 में शुरू कराया था मिल
जूट मिल की स्थापना 1936 में दरभंगा महाराज के द्वारा कराई गई थी। उसके बाद उन्होंने इसे अंग्रेजों को दे दिया। 1953 में अंग्रेजों ने इसे एमपी बिरला को दिया था। वहीं बिरला ने एमपी संतोष कुमार बगरोदिया को दे दिया। इसके बाद इसे 2009 में प्रकाश चंद्र चरूरिया को चलाने के लिए दे दिया।

20 बार से ज्यादा बार बंद हो चुका है मिल
जूट मिल मजदूर यूनियन के अध्यक्ष नौशाद आलम, महामंत्री अमरनाथ सिंह, संयुक्त सचिव राज कुमार राय आदि ने बताया कि अपने स्थापना काल से अबतक मिल 20 से ज्यादा बार बंद हो चुका है। 2003 में यह सात माह, 2012, 2014 में 19 दिन के लिए बंद हुआ था। वहीं 6 जुलाई 2017 से अब तक बंद था।

मिल में प्रतिदिन 70 टन जूट का होता था उत्पादन

बताया जाता है कि मिल में प्रतिदिन 70 टन जूट का उत्पादन होता था। 2014 में मिल में आग लगने से 2 करोड़ रुपए के जूट व मशीन का नुकसान हुआ। उसके बाद उत्पादन आधा हो गया। मिल के लिए कच्चा माल पूर्णिया के गुलाब बाग, कटिहार, अररिया, किशनगंज व पश्चिम बंगाल के गलकोला आदि क्षेत्र से आता है।

3 हजार मजदूरों का 42 करोड़ रुपए है बकाया

बताया जाता है कि मील पर 3 हजार कर्मियों का करीब 42 करोड़ रुपए बकाया है। इसमें 33 करोड़ रुपए पीएफ व 8 करोड़ उपादान की राशि है। वहीं मिल पर 70 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया है। जबकि सरकार पर मिल का 10.26 करोड़ रुपए बकाया है।

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