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परेशानी:सिंघिया में कमला, जीवछ नदी के जलस्तर में उछाल, 24 घंटे में 6 सेमी बढ़ा पानी, सालेपुर, क्योटहर में घुसा पानी

समस्तीपुर15 दिन पहले
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बंगरहट्टा वार्ड - 14 की सड़क पर बहता कमला नदी का पानी। - Dainik Bhaskar
बंगरहट्टा वार्ड - 14 की सड़क पर बहता कमला नदी का पानी।
  • जलमग्न होने के बाद से सिर्फ लोगों को नहीं बल्कि पशुओं को भी दिक्कत, नहीं मिल रहा चारा

विगत 25 दिनों से प्रखंड होकर गुजरने वाली कमला व जीवछ नदी में उतार चढ़ाव जारी है। जिसके कारण दोनों नदी रौद्र रूप की ओर बढ़ रही है। जलवृद्धि के कारण प्रखंड क्षेत्र के कुंडल टू, महरा, हरदिया, बांगरहट्टा, वारी, निरपुर भररिया, सालेपुर, क्योटहर, विष्णुपुर डीहा, आदि पंचायतों में स्थिति भयावह बनती जा रही है। स्थानीय लोगों की माने तो विगत 24 घंटे में इन दोनों नदियों में 6 सेंटीमीटर से अधिक पानी की बढ़ोतरी मापी गई है। इसके कारण लोग संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर सहमे हुए है।

कमला नदी में पानी की बढ़ोतरी के कारण पीपरा वारी, बंगरहट्टा गांव में नदी की पानी ओवरफ्लो कर गांवों में प्रवेश करने की स्थिति में आ चुकी है। बांगरहट्टा पंचायत के वार्ड -14 व वारी पंचायत के वार्ड - 13 नदी ओवरफ्लो कर वार्ड तक जाने वाली मुख्य सड़क पर बहने लगी है। स्थानीय लोगों का अंदाजा है नदियों में जलवृद्धि जारी रहा तो दो से तीन दिनों में इन पंचायतों के अधिकतर वार्डो में पानी प्रवेश कर जाएगा। इधर क्षेत्र में बढ़ते पानी के दबाव कारण थरघट्टा, वलाट, जमुआ, बिषहरिया, मुषहरणीय, बंगठैया, नवटोलिया, भाईरसो, कंकाड़ी समेत कई दलित बस्ती में लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। घरों में पानी प्रवेश करने का सिलसिला जारी है। लोग घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे है। हरे चारे की किल्लत से जूझ रहे किसान | प्रखंड क्षेत्र के निचले इलाका बेला, श्रीपुर मौआन, मिल्की, थरघट्टा, वलाट, जमुआ, महद्दीपुर, पीपरा, भरिहार, बारा, सोनसा, सोनमणि आदि गांवों में बाढ़ का सैलाब कहर बनकर टूट पड़ी है। हरा चारा डूबने के बाद पशुपालक किसानों के सामने चारे की घोर किल्लत हो गई। अब किसानों को परिजनों के साथ दुधारू पशुओं की भूख मिटाने की चिंता सताने लगी है। सोनमणि के ललन यादव, पीपरा के शिवजी यादव, मदन यादव, रवि सदा, अनीता देवी आदि में बताया कि बाढ़ के पानी में हरा चारा डूबने के बाद से हरे चारे की आभाव में पशु कमजोर होने लगे है।

इसके कारण दूध की मात्रा कम होने लगे है। ऐसे में हरा चारा इकट्ठा करने के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न हो गई है। क्षेत्र में हरा चारा की आभाव हो जाने के कारण कोसों दूर रोसड़ा, शिवाजीनगर, हसनपुर आदि प्रखंड जाकर चारा की व्यवस्था करनी होती है। इसके कारण दिन भर का समय पशुओं की चारा इकट्ठा करने में बीत जाता है। इसके कारण पशुपालक के सामने पशुओं की चारा की व्यवस्था करना चुनौती बनी हुई है।

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