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मुसीबत की बाढ़:लैला चौर की सड़क का पुल ध्वस्त 10 गांव के हजारों लोग हुए प्रभावित

समस्तीपुर3 दिन पहले
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केवटी प्रखंड के पोखर-बरही-कोयलास्थान रोड के लैला चौर में बना पुल ध्वस्त। - Dainik Bhaskar
केवटी प्रखंड के पोखर-बरही-कोयलास्थान रोड के लैला चौर में बना पुल ध्वस्त।
  • यह पुल पहले से ही क्षतिग्रस्त था, अब टूट जाने से आवागमन पूर्णतया बंद

केवटी प्रखंड क्षेत्र से गुजरने वाले बाढ़ पोखर-बरही-कोयलास्थान पथ के लैला चौर स्थित सड़क पुल के ध्वस्त हो जाने के कारण आवागमन बंद हो गया। इस पथ में आवागमन बंद हो जाने से चक्का, लहवार, परसा, बिशनपुर, लालगंज, बाढ़ समैला, बनसारा, कमलदह, जिबड़ा और छतवन तक की हजारों की आबादी प्रभावित हो गई है। इसके अलावे साइकिल, मोटरसाइकिल और पैदल जाने-आने वाले शॉर्टकट रास्ता का प्रतिदिन प्रयोग कर दरभंगा-मधुबनी जाते थे। अब उनकी परेशानी बढ़ गई है। अब इन्हें 15-20 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ेगा।

इस पथ में चार चक्का वाहनों का परिचालन पहले से ही बंद कर दिया गया था। लालगंज पंचायत की मुखिया के पति शिव शंकर यादव, राजद नेता पन्ना यादव, मो. यासीन, बरही निवासी पवन यादव, रेयाज अंसारी, आलिक रहमानी ने बताया कि लैला चौर में हर वर्ष पानी का भारी दबाव रहता है। इस पुल की लंबाई भले ही ज्यादा है, लेकिन नीचे से जल निकासी का रास्ता काफी छोटा है। इसके कारण बार-बार यहां पुल और सड़क प्रभावित होते रहा है। गत वर्ष भी इस पुल के ऊपर से बाढ़ का पानी बह रहा था। जिसकी वजह से आवागमन बाधित हुआ था।

पूर्व में यहां एक लकड़ी का पुल था, बाद में केवटी के तत्कालीन विधायक गुलाम सरवर ने लोगों के आवागमन की समस्या को देखकर इस पुल का करीब 20 वर्ष पहले निर्माण करवाया था। अब जर्जर पुल की जगह इलाके के लोगों ने बड़ा और ठोस पुल बनवाने की मांग की है।

बाढ़ में चचरी पुल बह जाने के बाद बीमार होने पर नाव से मरीज को ले जाने के लिए मजबूर हैं

नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार हाे रही बारिश से कमला नदी के जल स्तर में हुई वृद्धि से भेरियारही गांव एक बार फिर चाराें तरह से बाढ़ के पानी से घिर गया है। लाेगाें का प्रखंंड व जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क भंग हाे गया है। मालूम हाे कि इस गांव में लाेगाें के अावागमन के लिए श्रमदान से बनाया गया चचरी पुल बाढ़ के शुरुआती दाैर में ही पानी में बह गया था। लाेग नाव से अावागमन करते थे। एक बार फिर बाढ़ अाने से लाेगाें की समस्या बढ़ गई है। पांच साै की अाबादी वाले इस गांव के लाेगाें काे हर साल बाढ़ का पीड़ा झेलना पड़ रहा है। बीमार पड़ने पर लाेग राेगी काे नाव से ले जाते हैं। ग्रामीणाें के सहयोग से हर बार चचरी पुल का निर्माण हाेता है अाैर बाढ़ अाने पर यह नदी में बह जाता है। लालू यादव ने कहा कि हमलाेगाें काे सरकारी स्तर पर नाव मुहैया नहीं करवाई गई है। निजी नाव से लाेग अावागमन करते हैं। महेश यादव एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित हंै। उन्हें डॉक्टर से दिखाने के लिए नाव से झंझारपुर ले गए। लोगों ने बताया कि हर साल ऐसी समस्या झेलनी पड़ती है।

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