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अधिक मास:कल से प्रारंभ हो रहा मलमास, ज्योतिष ने कहा- इस मास में भगवान के स्मरण से होती है मन और आत्मा की शुद्धि

समस्तीपुर11 दिन पहले
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  • शादी-विवाह, गृह प्रवेश, गृहारंभ, मुंडन जैसे शुभ व मांगलिक कार्य मलमास के दौरान नहीं हो पाएंगे

18 सितंबर से मलमास शुरू हो रहा है। इसके साथ ही शादी विवाह, गृह प्रवेश गृहारंभ मुंडन आदि जैसे शुभ व मांगलिक कार्य नहीं हो पाएगा। ज्योतिष पंडित संजय शुक्ला शास्त्री ने कहा कि धर्म-कर्म की दृष्टि से मलमास का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार मलमास प्रत्येक 3 वर्ष में एक बार आता है। मलमास में शादी-विवाह गृह प्रवेश गृहारंभ मुंडन आदि जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। मलमास में पूजा-पाठ व्रत उपासना दान व साधना को सर्वोत्तम माना गया है। मलमास में भगवान का स्मरण करना चाहिए। इस मास में किए गए दान आदि का कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। इस मास को आत्मा की शुद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है। 18 सितंबर से आरंभ हो रहा है। मलमास 16 अक्टूबर को समाप्त होगा। 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का पर्व आरंभ हो जाएगा।

16 अक्टूबर को होगा समापन, मलमास में भगवान विष्णु की पूजा का होता है विशेष महत्व
मलमास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। इस समय चतुर्मास चल रहा है। चतुर्मास में भगवान विष्णु विश्राम करते हैं और विश्राम करने के लिए पाताल लोक में चले जाते हैं। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय ज्योतिष में सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिक मास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह 16 दिन और 8 घाटी के अंतर से आता है।

3 साल में एक चंद्रमास आता है, इसी को कहते हैं मलमास
शास्त्री ने बताया कि मलमास या अधिक मास का आधार सूर्य और चंद्र की चाल से है, जो वर्ष में 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। इन दोनों बरसों के बीच 11 दिनों का अंतर होता है। यही अंतर 3 साल में 1 महीने के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर 3 साल में एक चंद्रमास आता है। इसी को मलमास कहा जाता है।

वाद-वाद अधिक होने की संभावना

पंडित संजय शुक्ला शास्त्री ने कहा कि भाद्रपद, जेष्ठ, एवं आश्विन मास में जब अधिक मास होते हैं तो राष्ट्र एवं राजनेताओं के लिए शुभ फलप्रद नहीं होते हैं। प्रजाओं में कल्ह, रोग, शोक का वातावरण, राजनेताओं में वाद विवाद आरोप-प्रत्यारोप व भ्रष्टाचार से क्लेश पद त्याग व परिवर्तन का योग होता है।

विष्णु मंत्र का जप करें

इस मास में प्राणघातक रोग आदि की निवृत्ति के लिए रुद्र जपआदि अनुष्ठान कपिल षष्ठी व्रत,श्राद्ध, दान, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ विष्णु मंत्र का जप आदि कार्य करना चाहिए।

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