कार्यशाला:मशरूम मानव स्वास्थ्य के लिए बहुमूल्य औषधि के साथ-साथ पोषक खाद्य पदार्थ भी : कुलपति

समस्तीपुरएक महीने पहले
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पूसा में कार्यक्रम को संबोधित करते कुलपति। - Dainik Bhaskar
पूसा में कार्यक्रम को संबोधित करते कुलपति।
  • कुपोषण को कम करने तथा मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में रोजगार को बढ़ाने पर दिया गया जाेर

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा के विद्यापति सभागार में मशरूम के सेवन से ग्रामीण युवाओं में कुपोषण के स्तर को घटाने तथा मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में रोजगार के अवसर को बढ़ाने के विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्घटान विवि के कुलपति डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने किया। दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यशाला में कृषि विवि पूसा एवं देश के कई प्रमुख कृषि संस्थानों से ऑनलाइन मोड में जुड़े कई कृषि वैज्ञानिक आपस में चिंतन मंथन करेंगे। इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि मशरूम मानव स्वास्थ्य के लिए बहुमूल्य औषधि एवं एक बेहतरीन पोषक खाद्य पदार्थ है। इसमें बहुत से पोषक तत्व जैसे-एमिनोएसिड, लवण, विटामिन आदि मौजूद होते हैं जिनके कारण मशरूम स्वास्थ्यवर्धक, औषधीय गुणों से युक्त, रोगरोधक एवं सुपाच्य खाद्य पदार्थ के रूप में जाना जाता है।

गंभीर रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है मशरूम
उन्होंने कहा कि मशरूम का निरंतर सेवन ट्यूमर, मलेरिया, मिर्गी, कैंसर, मधुमेह, रक्तस्राव आदि जैसे गंभीर रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। डॉ. मिथलेश कुमार ने कहा की हाल के वर्षों पर गौर करें तो मशरूम का उत्पादन ग्रामीण युवाओं के लिए एक अच्छा व्यवसाय साबित हो रहा है। मशरूम सेहत का रखवाला है और इसकी मांग बाजारों में लगातार बढ़ रही है। हालांकि इसकी आपूर्ति को और अधिक बढ़ाने की जरूरत हैं। डॉ. केएम सिंह ने कहा कि कृषि विवि, केंद्र सरकार व राज्य सरकारें सभी स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाले तमाम तरह की योजनाओं पर लगातार बल दे रही है। मशरूम उत्पादन स्वरोजगार का एक बेहतर जरिया है तथा इसका उत्पादन और व्यवसाय खासकर ग्रामीण युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहा है। डॉ. एमएन झा ने कहा कि गांव ही नहीं बल्कि अब शहरों में भी शिक्षित युवा मशरूम का कारोबार कर अच्छी से अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं।

छाेटे जगहाें पर भी हाे रही मशरूम की खेती
डॉ. दयाराम ने कहा कि मशरूम की खेती छोटे से छोटे जगह में शुरू की जा सकती है। साथ ही इसका उत्पादन बेहद कम लागत में भी शुरू किया जा सकता है। लागत की तुलना में मशरूम कई गुना ज्यादा मुनाफा देता है। मंच संचालन डॉ. सुधा नंदनी ने किया। मौके पर विवि के अधिष्ठाता मानविकी संकाय डॉ. सोमनाथ राय चौधरी, बिहार के डिप्टी डायरेक्टर हार्टिकल्चर राकेश सिंह, प्रगतिशील मशरूम उत्पादक किसान प्रतिभा झा, मनोरमा सिंह, बिनीता कुमारी, जोया जैनब, पुष्पा झा, सोनी यादव, राजीव रंजन, शशि भूषण तिवारी, अजय यादव आदि मौजूद थे।

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