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परेशानी :गलाघोंटू और लंगड़ा बुखार का टीकाकरण नहीं होने से 10 से 15 फीसदी पशुओं में दिखाई देने लगे बुखार के लक्षण, पशुपालकों की बढ़ी परेशानी

समस्तीपुर15 दिन पहले
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जिले में बरसात से पूर्व पशुओं में गलाघोंटू और लंगड़ा बुखार का टीकाकरण नहीं होने से 10 से 15 फीसदी पशुओं में बुखार के लक्षण दिखाई देने लगे है। बताया जाता है कि प्रखंड के जितवारपुर में 4 पशु, बिशनपुर 4, छतौना के सूरतपुर वार्ड नंबर-8 में 5 पशुओं में बुखार के लक्षण सामने आ रहे है। कोरोना वायरस को लेकर लॉकडाउन के कारण विभाग की ओर से एचएसएंडबीक्यू टीकाकरण नहीं हो सका है। जबकि खुरहा-मुंहपका (एफएमडी) का टीकाकरण प्रभावित हुआ है। वजबकि पशुपालक किसानों को गलाघोंटू व लंगड़ा बुखार के बारे में जानकारी का अभाव होने से भी दिक्कत आ रही है

गलाघोंटू और लंगड़ा बुखार के लक्षण
गलाघोंटू घातक संक्रामक बीमारी है। जो अधिकतर बरसात के मौसम में ही पशुओं को चपेट में लेता है। पशुओं को तेज बुखार, मुंह पर सूजन, मुंह से लार निकलना पशु द्वारा जीभ निकालकर सांस लेने यह लक्षण है। यह रोग भैंसों में अधिक होती है। लक्षण सामने आते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। मानसून शुरू होने से पहले अपने पशुओं को टीकाकरण करवा लेना चाहिए। जबकि लंगड़ा बुखार दस माह से दो वर्ष के पशुओं को अधिक प्रभावित करता है। इसके लक्षण पशुओं को तेज बुखार, जांघों के ऊपर, कंधों या गर्दन पर दर्द एवं सूजन होता है।  

बरसात के मौसम में गलाघोंटू और लंगड़ा बुखार पशुओं को अपनी चपेट में लेता है। इसके बचाव के लिए टीकाकरण करना कारगर है। लेकिन कोरोना वायरस को लेकर इस बार मई, जून में होने वाला टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। यह अब सितंबर में कराया जा सकता है। इस बीमारी के लक्षण होने पर तुरंत किसान चिकित्सकों से संपर्क करना चाहिए ताकि मवेशियों का तुरंत उपचार किया जा सके। 
डॉ. विजय कुमार, शल्य चिकित्सा पदाधिकारी, समस्तीपुर

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