अनदेखी / पीएचसी में केवल इमरजेंसी मरीजों का हो रहा है इलाज, सामान्य रूप से मरीजों को हो रही परेशानी

Only emergency patients are being treated in PHC, patients are suffering in general
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Only emergency patients are being treated in PHC, patients are suffering in general

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

समस्तीपुर. कोरोना संक्रमण को लेकर लागू लाॅकडाउन में खानपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इमरजेंसी सेवा को छोड़कर सामान्य ओपीडी सेवा बंद होने से सामान्य रोगों से पीड़ित मरीजों का इलाज नहीं हो पा रही है। इस कारण सामान्य रोगी हल्की सर्दी, खांसी, बुखार, बदन दर्द, पेट खराब आदि जैसे मरीज चलते-फिरते ग्रामीण चिकित्सकों से परामर्श लेकर दवा खाने को मजबूर हैं। मौसम के बदलते मिजाज से कोई बदन दर्द तो कोई पेट खराब तो कोई हल्की बुखार से परेशान हैं।

लोग कोरोना संक्रमण की बात को लेकर भी भयभीत हो जाया करते हैं। निजी अस्पताल में भी इलाज अभी बंद होने से मरीजों के सामने कोई चारा नहीं दिख रहा है। हालांकि, ऐसे मरीज चलते-फिरते ग्रामीण चिकित्सकों से परामर्श लेकर दवा खरीदकर काम चलाने को विवश हैं। अस्पताल में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों की माने तो अस्पताल में सामान्य ओपीडी सेवा अभी बंद है। इस कारण सामान्य रोगों से पीड़ित मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है। देखा जा रहा है कि हर दवा दुकानों पर लोगों की आवाजाही लगी रहती है। कोई बुखार के तो कोई सर्दी, खांसी, पेट दर्द, पेट खराब, बदन दर्द आदि के दवा खरीदते नजर आते हैं।

अस्पताल में ओपीडी सेवा बंद रहने से सामान्य रोगियों का जांच व इलाज नहीं हो रहा है। सूत्रों की मानें तो निजी क्लिनिक में मरीजों का इलाज तो किया जा रहा है, लेकिन दूर से ही चिकित्सक मरीजों का लक्षण पूछकर दावा की सलाह दे देते हैं। अगर जांच की आवश्यकता महसूस होती है तो उसे जांच के लिए भेज दिया जाता है। ऐसे में गरीब मरीजों को आर्थिक रूप से काफी परेशानी होती है।
डाॅक्टराें में भी है दहशत, डर-डर करते हैं इलाज 
जानकारी के अनुसार निजी क्लिनिक के चिकित्सक भी मरीजों का इलाज डर-डर कर करते हैं। इस प्रकार से जिले में भी कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, उससे सभी चिकित्सक व अन्य लोग भयभीत हैं। आखिर इलाज भी तो जरूरी है। यही सोचकर प्राइवेट चिकित्सक मरीजों का इलाज करते हैं। इस दौरान काफी सतर्कता बरती जा रही है। एक निजी क्लिनिक के डॉक्टर ने बताया कि आखिर कबतक इलाज नहीं किया जाएगा। अपना भी रोजी-रोटी का सवाल है। इसलिए दूर से ही सही, मरीजों का इलाज उसके लक्षण व परेशानी पूछकर दवा की सलाह दे दी जाती है।

कहते हैं पीएचसी के अधिकारी 
अभी इमरजेंसी सेवा को छोड़कर बांकी सेवाओं के लिए ओपीडी बंद है। ओपीडी सेवा चालू करने के लिए पीएचसी को कोई दिशा-निर्देश भी नहीं मिला है। जगह-जगह क्वारेंटाइन सेंटरों में प्रवासी मजदूरों की जांच में चिकित्सकों की ड्यूटी लगी है।
डॉ सुधीर कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी पीएचसी खानपुर।

कई दवा दुकानदार से तो कई ग्रामीण डॉक्टर से ले रहे परामर्श 
पीएचसी में प्रतिदिन करीब 2 सौ से 250 मरीजों का इलाज ओपीडी में प्रतिदिन हो रहा था। लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन घोषित होने के बाद से ही अस्पताल में ओपीडी सेवा को बंद कर दिया गया है। इस कारण अब सामान्य मरीजों के सामने परेशानी उत्पन्न हो गई है। ऐसे मरीज या तो दवा दुकानदारों से या फिर ग्रामीण चिकित्सकों से परामर्श लेकर दवा दुकान से दवा खरीदकर खाने को मजबूर हैं। लोगों का बताना है कि लाॅकडाउन की वजह से गरीब व मजदूर लोगों के सामने पैसे की किल्लत ने परेशानी उत्पन्न कर दिया है। अब भी कोई काम नहीं मिल रहा है, जिससे पैसे की आमदनी की जाए। लेकिन बीमारी तो मानती नहीं है। ऐसी परिस्थिति में गरीब मरीजों को दवा खरीदने के लिए भी पैसे की इंतजाम करना कठिन हो गया है। सरकारी अस्पताल में तो फ्री में दवा मिल जाती थी। लेकिन अब उसी दवा के लिए पैसे लग रहे हैं।

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