मास्क जरूरी है:5 हॉस्पिटलों में लगा ऑक्सीजन प्लांट सदर अस्पताल छोड़ 4 जगह हुआ चालू

समस्तीपुरएक महीने पहले
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सदर अस्पताल में बनकर तैयार ऑक्सीजन प्लांट। - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल में बनकर तैयार ऑक्सीजन प्लांट।
  • कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए किया गया चालू

सिटी रिपोर्टर | समस्तीपुर कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौतों से सबक लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने सदर अस्पताल के अलावा पटाेरी, दलसिंहसराय, पूसा व रोसड़ा अनुमंडलीय अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने फैसला लिया था, ताकि मरीजों को निर्बाध रूप में ऑक्सीजन मिलती रहे। बाहरी सिलेंडर की निर्भरता समाप्त हो। सभी ऑक्सीजन प्लांटों को अक्टूबर महीने तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था। जिले के पटोरी, दलसिंहसराय, पूसा व रोसड़ा अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट को गत महीना शुरू कर दिया गया।

मरीजों के लिहाज से महत्वपूर्ण सदर अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट को आज तक चालू नहीं किया गया है। कोरोना की दूसरी लहर में सर्वाधिक 40 कोरोना पीड़ितों की मौत सदर अस्पताल में हुई थी। बावजूद ऑक्सीजन प्लांट लक्ष्य के अनुरूप नहीं बनाया गया। सदर में गत अक्टूबर महीने में ही प्लांट शुरू करने का लक्ष्य था। सिविल सर्जन डॉ सत्येंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि सदर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट बन कर तैयार है। सिर्फ सदर अस्पताल में मेनीफोल्ट लगाया जाना बाकी है। एक सप्ताह के अंदर मेनीफोल्ट लगाने का काम पूरा कर ऑक्सीजन प्लांट को शुरू कर दिया जाएगा। इस ऑक्सीजन प्लांट से 1000 एलपीएम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा।
अलग-अलग कार्य एजेंसी के कारण प्लांट शुरू करने में हुई देरी : सदर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट बनाने, कनेक्शन व पाइप वायरिंग के लिए अलग-अलग कार्य एजेंसी है। प्लांट की जिम्मेवारी एनएचआई को थी। मेनीफोल्ट लगाने का काम सीएमसीएल व पाइप वायरिंग स्वास्थ्य विभाग को कराना था। प्लांट बन गया, बाइप की वायरिंग भी हो गई पर मेनीफोल्ट नहीं लगा। इससे प्लांट से बेड तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच रही है। इससे लोग लाभ से वंचित हैं।

हवा से ऑक्सीजन निकाल कर की जाती है सप्लाई
पीएसए (प्रेशर स्विंग एब्‍सार्पशन) प्लांट में हवा से ही आक्सीजन बनाने की अनूठी तकनीक होती है। इसमें एक चैंबर में कुछ सोखने वाले रासायनिक तत्व डालकर उसमें हवा को गुजारा जाता है। इसके बाद हवा का नाइट्रोजन सोखने वाले तत्वों से चिपककर अलग हो जाता है और आक्सीजन बाहर निकल जाती है। इस आक्सीजन की ही अस्पतालों को आपूर्ति की जाती है। इसके लिए दबाव काफी उच्च रखना होता है। सोखने वाले तत्वों के रूप में जियोलाइट, एक्टिवेटेड कार्बन और मॉलीक्यूलर का इस्तेमाल होता है।

अस्पतालों में सिलेंडर की उपयोगिता होगी खत्म

सदर अस्पताल समेत शाहपुर पटोरी और रोसड़ा अनुमंडलीय अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के शुरू हो जाने के बाद उक्त अस्पतालों में बेड पर छोटा ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने की उपयोगिता समाप्त हो जाएगी। प्लांट से सीधा बेड तक मरीजों को पाइप लाइन के द्वारा अबाध ऑक्सीजन की आपूर्ति मिलेगी। ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने की दिशा में सिलेंडर बदलने का भी झंझट नहीं रहेगा।

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