पहल:स्कूली बच्चों के 80 दिनों का राशन उनके अभिभावकों को दिया जाएगा

समस्तीपुरएक वर्ष पहले
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बैंक खाते में भेजी जाएगी मूल्य परिवर्तन की राशि
कोरोना पर रोकथाम के लिए विद्यालय बंदी व ग्रीष्मावकाश को लेकर सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल 4 मई 2020 से बंद हैं। वहीं 31 जुलाई तक इसे बंद रहने का पूर्व निर्देश प्राप्त हो चुका है। इस प्रकार कुल 80 दिनों की अवधि के बंद को लेकर बच्चों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं इस दौरान खाद्यान्न के मूल्य में हुए परिवर्तन को लेकर अतिरिक्त राशि उनके खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। बताया जाता है कि फूड सिक्यूरिटी एक्ट के तहत यह लाभ दिलाया जाएगा। जिसमें मई माह में 24 कार्य दिवस, जून में गर्मी की छुट्टी सहित 30 दिनों व जुलाई में 26 कार्य दिवस के खाद्यान्न व अतिरिक्त राशि का लाभ मिलेगा। इसको लेकर सभी सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त प्रारंभिक विद्यालयों में खाद्यान्न वितरण के लिए कक्षावार रोस्टर बनाया जाएगा। यहां अनाज लेने के लिए केवल अभिभावक आएंगे। 

खाद्यान्न वितरण के लिए स्कूलों में कक्षवार बनाया जाएगा रोस्टर

1-5 कक्षा तक के लिए 8 व 6-8 को 12 किलोग्राम अनाज
80 दिन के कार्य दिवस को लेकर वर्ग 1-5 के बच्चों को प्रति छात्र 8 किलोग्राम अनाज व वर्ग 6-8 के प्रति छात्र को 12 किलोग्राम खाद्यान्न दिया जाएगा। इसमें 1-5 तक को 100 ग्राम व 6-8 के बच्चों का 150 ग्राम के हिसाब से अनाज मिलेगा।
4.48 व 6.71 रुपए के हिसाब से मिलेगी खाद्यान्न की राशि
वहीं खाद्यान्न की बढ़ी कीमतों को लेकर 1-5 वर्ग के प्रत्येक बच्चे को 4.48 रुपए व वर्ग 6-8 के बच्चों को 6.71 रुपए राशि प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाएगा। इससेे 1-5 के बच्चों को 358 व 6-8 के प्रत्येक बच्चों को 536 रुपए खाते में डीबीटी से भेजा जाएगा।
विद्यालयों में पहले से बचे हुए खाद्यान्न का होगा पहले वितरण
बताया जाता है कि अभिभावकों को विद्यालयों में पूर्व से भंडारित खाद्यान्न का ही पहले वितरण किया जाएगा। वहीं विद्यालयों का अनाज कम पड़ने पर एचएम डीपीओ एमडीएम से अतिरिक्त खाद्यान्न की मांग कर बच्चों के अभिभावकोंं को उपलब्ध कराएंगे। 
अभिभावकों को उपलब्ध कराया जाएगा 80 दिनों का खाद्यान्न
लॉकडाउन व गर्मी छुट्टी को लेकर अभिभावकों को 80 दिनों का खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा। बच्चों के खाते पर डीबीटी के माध्यम से इस अवधि का राशन के परिवर्तन मूल्य की राशि भेजी जाएगी। विद्यालयों में रोस्टर बनाया जा रहा है।
- बिरेन्द्र नारायण, डीईओ।

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