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बिहार में अंतिम संस्कार के नाम पर भी वसूली:सरकार का आदेश- फ्री में होगा कोरोना मरीजों का अंतिम संस्कार, समस्तीपुर सदर अस्पताल का कर्मचारी बोला- 5000 से पांच पैसा कम नहीं लेंगे

समस्तीपुर2 महीने पहले
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वीडियो से ली गई तस्वीर। इसमें दिख रहा शख्स सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस का कर्मी नागेंद्र मल्लिक है। - Dainik Bhaskar
वीडियो से ली गई तस्वीर। इसमें दिख रहा शख्स सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस का कर्मी नागेंद्र मल्लिक है।

बिहार सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि कोविड मरीजों का अंतिम संस्कार सरकारी खर्च पर होगा। परिजनों से एक रुपए नहीं लिया जाना है। बावजूद इसके समस्तीपुर सदर अस्पताल के कर्मी ने एक परिवार से कोविड शव के अंतिम संस्कार के लिए 5000 रुपए मांगे। उसने यह भी कहा कि 5000 से 'एक नया पैसा' कम नहीं लगेगा। जिसे अपने परिजन का अंतिम संस्कार कराना था, वो 2000 रुपए देने को तैयार था, लेकिन अस्पताल के कर्मी ने साफ इन्कार कर दिया। इस पूरी बातचीत को रिकॉर्ड किया गया और अब यह वीडियो सदर अस्पताल प्रशासन के लिए सरदर्द बन गया है।

वीडियो में कर्मी ने कहा- सरकार अपने बाप के घर से देगी रुपए?

यह वीडियो समस्तीपुर सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम गली के पास का है। इसे दो दिन पहले रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो में पीड़ित परिजन अस्पताल के कर्मी नागेंद्र मल्लिक के पीछे भाग रहा है। भागते हुए कहता है-

'हे भाई हे, दो हजार दे दई छिईय। (दो हजार दे देते हैं) काम कर दीजिए।
'नहीं हो, पांच हजार से पांच नियां कम नयी लगतअ। (पांच हजार से पांच पैसा कम नहीं लगेगा)
कर्मी पांच हजार का खर्च गिनाता है- 12 सौ रुपए क्विंटल से चार क्विंटल लकड़ी, दो सौ का कपड़ा व पन्नी, पांच सौ रुपए का टायर। फिर कहता है- तू ही सब व्यवस्था कर के द। (आप ही सब व्यवस्था कर के दीजिए)
पीड़ित कहता है- शव जलाने का पैसा तो सरकार देती है। इस पर कर्मी कहता है- सरकार अपन बाप के घर से देतई। (सरकार अपने बाप के घर से देगी?) अंतिम संस्कार करावे के हई त पांच हजार से पांच पैसा कम नहीं लगेगा।
यह कहता हुआ कर्मी पोस्टमार्टम हाउस में प्रवेश कर जाता है।

अस्पताल कह रहा- मृतक कोविड मरीज नहीं था, फिर भी जांच करेंगे

रुपए मांगने वाला वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन सकते में है। सिविल सर्जन डॉ सत्येंद्र कुमार गुप्ता ने मामले की जांच प्रभारी डीएस हेमंत कुमार को देते हुए पोस्टमार्टम कर्मी नागेंद्र मल्लिक से स्पष्टीकरण पूछा है। सीएस ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी। हालांकि अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि शव कोविड का नहीं था। वैसे किसी भी शव के अंतिम संस्कार के लिए पैसा लिया जाना गलत है।

परिवार के लोग खुद शव ले कर चले गए

पांच हजार रुपए नहीं दे पाने के कारण मृतक का शव लेकर परिजन ऑटो से मुसरीघरारी चले गए। चर्चा है कि अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही के कारण पता नहीं और कितने लोग कोरोना की चपेट में आएंगे।

दो वर्ष पूर्व हटाई गई थी महिला कर्मी

करीब दो वर्ष पूर्व सदर अस्पताल में शव के पोस्टमार्टम के बदले पांच-पांच हजार रुपए मांगे जाने की शिकायत के बाद तत्कालीन महिला कर्मी मंजू देवी को डीएम के आदेश पर हटाया गया था। मंजू को हटाने के बाद अस्पताल के कर्मी नागेंद्र मल्लिक को यह जिम्मेवारी दी गई थी। कुछ दिनों तक व्यवस्था सामान्य थी, लेकिन फिर पैसे मांगे जाने की शिकायत आने लगी है।

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