भागवत कथा:शबरी ने गुरु की बात को मनोयोग से निभाया, इस कारण भगवान को बेर खिलाने का मिला मौका : अजय शास्त्री

समस्तीपुरएक महीने पहले
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कथा श्रवण करते श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
कथा श्रवण करते श्रद्धालु।
  • संगीतमय श्रीराम कथा प्रेम यज्ञ में कथावाचक ने श्रद्धालुओं को श्रीराम-शबरी मिलन प्रसंग से कराया रूबरू

श्रीराम कथा के अंतर्गत शबरी के बेर प्रसंग भक्त-भगवान व गुरु की महानता का प्रतीक है। अगाध आस्था के कारण ही भगवान श्रीराम व शबरी का मिलन हुआ। और भगवान श्रीराम ने शबरी के दिए हुए जूठे बेर खाए। शबरी ने भले ही छल-प्रपंच से भगवान श्रीराम को झूठे बेर खिलाई। लेकिन उस जूठे बेर में प्रेम और पराकाष्ठा भरी हुई थी। यह प्रसंग प्रखंड के सकरपुरा में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा प्रेम यज्ञ में अयोध्या से पहुंचे कथावाचक अजय शास्त्री ने श्रद्धालुओं को श्रवण कराया। कथावाचक ने कहा कि श्रीराम कथा अनंत श्रेष्ठ प्रसंगों से भरी है। भीलनी शबरी का रामचंद्रजी को जूठे बेर खिलाना भक्त भगवान और गुरु की महानता का परिचायक है। ऋषि मातंग के कहने पर ही वर्षाें तक शबरी ने एक ही रास्ता निहारा और मुक्ति पाई।

रामायण हमें सामाजिक सीख ही नहीं देती। ईश्वर आस्था और प्रेम की पूर्णता से परिचय भी कराती है। भीलनी शबरी की कथा इसका सर्वोत्तम उदाहरण है। शबरी ने गुरु का कहा पूर्ण मनोयोग से निभाया। फलस्वरूप गुरु के कहे अनुसार शबरी के इष्ट श्रीराम सीताजी की खोज में उसी रास्ते से गुजरे जिस पर सारा जीवन शबरी आंखें लगाई रही। शबरी एक भीलनी भक्त थी। कहा जाता है कि शबरी की जब शादी होने वाली थी उस समय विवाह समारोह में कई बकरियों की बलि होने की सूचना पर वो व्यथित हो गई। वे इतने जीवों की हत्या का पाप अपने सिर नहीं लेना चाहती थी। उन्होंने उसी रात अपना घर छोड़ दिया और ऋषिमुनियों के आश्रम के लिए चल पड़ी। श्रीराम कथा के माध्यम से शबरी के बेर प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भक्तिमय माहौल में गोता लगाते रहे।

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