अनदेखी:राजकीय औषधालय गजपति का भवन खंडहर में हो रहा है तब्दील, भवन की दीवारें टूटकर ध्वस्त

समस्तीपुर6 महीने पहले
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  • जर्जर भवन व संसाधनों के अभाव में पिछले 30 सालों से लोगों को नहीं मिल रहा है लाभ, विभाग मौन

प्रखंड के गजपति स्थित राजकीय औषधालय का भवन अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। इस औषधालय का भवन ध्वस्त होकर जर्जर दीवारों में बदलने लगा है।‌ भवन की जर्जर स्थिति व संसाधनों के अभाव में पिछले 30 साल से इसका संचालन नहीं हो रहा है। इस कारण क्षेत्र के लोगों को इस औषधालय का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बताया जाता है कि 1951 में बिहार सरकार व स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त पहल पर गजपति में राजकीय औषधालय की स्थापना हुई। इसके लिए छह कमरे व दो बरामदे वाले भवन का निर्माण किया गया।

इस औषधालय के संचालन के लिए इसमें आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई, साथ ही कर्मचारियों की भी नियुक्ति की गई। स्थापना के अगले 40 सालों तक इस औषधालय का संचालन विभागीय तौर पर सही ढंग से होता रहा। इसके संचालन के दौरान गजपति के अलावा शंकरपुर, गिरधरपुर, अहिलवार, मौजी, सुरहा वसंतपुर, हरिपुर, सीही, बड़गांव, पिरौना आदि गांवों के लोग इस औषधालय में इलाज कराने व दवा लेने के लिए पहुंचते थे। लेकिन क्षेत्र के लोगों को इस औषधालय की सुविधा अधिक दिनों तक नहीं मिल सकी।  1990 के बाद इस औषधालय की स्थिति अचानक चरमरा गई। आवश्यक जीर्णोद्धार के अभाव में भवन की स्थिति काफी जर्जर हो गई। साथ ही संसाधनों का भी अभाव हो गया। भवन के जर्जर होने के कारण इसमें कार्यरत कर्मचारियों ने यहां आना बंद कर दिया। मरीज का आना जाना भी बंद हो गया। परिणाम यह हुआ कि औषधालय भवन पूरी तरह बंद हो गया। इस भवन की दीवारें टूटकर ध्वस्त हो चुकी है। इस औषधालय के संचालन नहीं होने से क्षेत्र के लोग इलाज कराने के लिए सीएचसी हसनपुर पहुंचने को विवश हैं। क्षेत्र के लोगों व जनप्रतिनिधियों ने सीएम को पत्र लिखकर खंडहर में तब्दील हो रहे औषधालय के भवन के निर्माण की मांग कर चुके हैं। लेकिन इस औषधालय के नए भवन के निर्माण के लिए अभी तक कोई पहल नहीं किया गया है। इस कारण क्षेत्र के लोगों में मायूसी व्याप्त है। लोग औषधालय के इस बदतर स्थिति के लिए स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता को दोषी मान रहे हैं।

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