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परेशानी:सिंघिया के मिल्की राम टोला तक जाने को सड़क नहीं, खेत की पगडंडी होकर गांव पहुंचते हैं लोग

समस्तीपुर2 महीने पहले
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पानी भरे खेतों की पगडंडी से गांव से बाहर निकलते लोग।  - Dainik Bhaskar
पानी भरे खेतों की पगडंडी से गांव से बाहर निकलते लोग। 
  • मानसूनी आहट के साथ ही टोले की लोगों को शुरू हो गई है परेशानी, गांव से निकलना हुआ मुश्किल

सरकार दलित तबके के विकास को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताती आ रही है। दलित टोले की विकास को लेकर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि से संबंधित तरह-तरह की योजनाएं बनाकर प्रत्येक वर्ष क्रियान्वयित किए जा रहे हैं। लेकिन दलित विकास के लिए किए जा रहे दावे धरातल पर दंभ भर रही है। इसका उदाहरण है प्रखंड के हरदिया पंचायत के अंतर्गत मिल्की राम महादलित टोला। सरकारी विकास इस गांव से पूर्व मुख्य सड़क तक आकर वर्षों से रुकी हुई है। टोले के लोगों घरों तक आने जाने के लोगों को आज भी सड़क नसीब नहीं हुआ।

इस टोले में करीब सौ से अधिक महादलित परिवार के लोग को आज भी मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए खेत की पगडंडी होकर चलने के लिए विवश है। देश की आजादी के हुए सात दशक बाद भी गांव तक सड़क पहुंचाने की कवायद वर्षों से प्रशासनिक प्रक्रिया में उलझी हुई है। इसका खामियाजा आज भी यहां के लोग भुगत रहे हैं। ग्रामीणाें ने बताया कि अन्य दिनों खेत की पगडंडी से होकर किसी तरह मुख्य सड़क तक पहुंच जाते। लेकिन मानसूनी आहट के साथ ही परेशानी शुरू हो जाती है। बाढ़ के दिनों तो घर से निकलना मुश्किल हो आता है।

इन दिनों पानी में तैरकर या नाव की खतरनाक सवारी कर मुख्य सड़क तक पहुंचना होता है। इस बार यास तूफान के कारण हुई बारिश ने नाको दम कर रखा है। स्थिति है खेतो में पानी जमाव होने के कारण टोला से निकलना मुश्किल हो गया है। गांव से बाहर निकलने के लिए घुटना, कमर भर पानी होकर आना होता है। रात के समय जहरीले कीड़े मकोड़े कटाने का खतरा बना रहता है। जबकि क्षेत्र में एकबार फिर से बाढ़ आने का खतरा मंडराने लगा है। ऐसे में वर्षों से मांग के बावजूद गांव तक सड़क पहुंचाने की प्रशासनिक प्रक्रिया उलझे रहने के कारण लोगों के मन में प्रशासन के विरुद्ध तरह तरह के उठ रहे है।

दूर नहीं की जा रही समस्या
समाजसेवी राजीव सिंह उर्फ़ लड्डू सिंह, ग्रामीण भोला राम, मदन राम, राम प्रसाद राम, श्रवण राम निर्मला देवी, नीलम देवी आदि ने बताया की सड़क की समस्या के निदान को लेकर विगत पांच वर्षों के अधिकारी के निर्देश पर पदाधिकारी ने गांव का दौरा कर भूमि मालिक से बात कर समंजन भी की। खेतों के बीच बनने वाली सड़क की भूमि मालिक से बातचीत भी की। कुछ भूस्वामियों रजामंदी के टोला के लोगों लगा की अब सड़क की समस्यां से निजात मिल जाएगी। लेकिन सालभर से सड़क की समस्या प्रशासनिक प्रक्रिया उलझे रहने के कारण प्रशासन की निष्क्रयता पर सवाल खड़ा कर दिया है।

सोनुपुर से पंचगामा जाने वाली मुख्य सड़क खेतों की पगडंडी से भी ज्यादा खराब, चलना मुश्किल

यह सड़क है सोनुपुर उत्तर पंचायत की जो सोनुपुर दुर्गामंदिर से पंचगामा गांव को जोड़ती है। कहने के लिए तो यह पक्की सड़क है किंतु सड़क की हाल खेतों की पगडण्डी से भी बदतर है। इसी बदतर सड़क से होकर इस पंचायत के लोग प्रतिदिन आने जाने के लिए विवश हैं। इस सड़क को बने ज्यादा दिन नहीं हुए है। इसलिए इसकी मेंटनेंस का जिम्मा अभी भी सड़क निर्माण करने वाली एजेंसी के जिम्मे ही है। किंतु एजेंसी मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति करते आ रही है। बरसात के दिनों में इस सड़क से होकर गुजरना किसी करतब से कम नहीं है। फिर भी प्रतिदिन गांव की बड़ी आबादी इसी जर्जर सड़क से होकर गुजरने पर विवश हैं। ऐसे में किसी दिन इस सड़क पर बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। हमेशा इस सड़क से गुजरने में लोगों को भय बना रहता है।
बरसात में हाेती है अधिक परेशानी | ग्रामीण कहते हैं वैसे तो यह पूरी सड़क ही जर्जर हो चुकी है, किंतु सबसे बुरा हाल दुर्गास्थान के पास की सड़क का है। बरसात में पानी और मिट्टी मिलकर दलदल बन चुकी है। इससे फिसलन बढ़ गई है फिर भी लोग पैदल और मोटरसाइकिल से इस सड़क से होकर ही गुजरते हैं। दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है। इस सम्बंध में गांव की मुखिया अनिता देवी के पति इंदल पासवान कहते हैं कि इस जर्जर सड़क की मरम्मत के लिए कई बार सम्बंधित एजेंसी के साथ सम्बंधित अधिकारियों के पास इस मुद्दे को उठा चुका हूं। मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है।

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