इनसाइड स्टोरी:चाची की मौत का गम भुलाने के लिए आर्मी जवान ने करीबी लोगों को बुलाया और पिलाई थी शराब

समस्तीपुर25 दिन पहले
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चाची की मौत का गम भुलाने के लिए आर्मी का जवान मोहन ने नजदीकी जानने वालों के लिए दिवाली की रात घर के करीब खाने-पीने की व्यवस्था की थी। विदेशी शराब की तीन क्वाट (750) एमएल बोतल शराब 10-12 लोगों ने मिल कर पी थी।

शराब पीने वालों में खुद आर्मी का जवान मोहन के अलावा ग्रामीण श्याम नंदन चौधरी, दिवाली पर घर आए बीएसएफ जवान विनय कुमार, दिवाली पर गुजरात से आए वीरचंद्र राय, यदुवंश राय, राजू कुमार (आर्मी जवान मोहन का चाचा) के अलावा अन्य लोग शामिल थे। लोगों ने बताया कि देर रात तक लोग मोहन के घर के पास स्थित दुकान के सामने चौकी पर बैठक कर शराब का सेवन करते रहे। शुक्रवार दोपहर से अचानक सभी लोगों की तबियत बिगड़ने लगी। लोगों ने बताया कि सबसे पहले लोगों की आंखों की रोशनी चली गई। उसके बाद पेट में दर्द व उल्टी होने लगी तो गांव में अफरातफरी मच गई। इलाका बाढ़ के पानी से घिरा है।

इससे तुरंत एंबुलेंस आदि की व्यवस्था नहीं हो पाई। लोगों ने सभी लोगों को गांव के ही निजी डॉक्टर के यहां भर्ती कराया। लेकिन स्थिति बिगड़ती चली गई। इसके बाद आर्मी जवान मोहन व बीएसएफ दारोगा के परिजन अलग-अलग एंबुलेंस से लेकर पटना चले। लेकिन रास्ते में ही दोनों की मौत हो गई। हालांकि आर्मी जवान के परिजन मोहन को लेकर दानापुर आर्मी हॉस्पिटल पहुंच गए। जबकि विनय को लेकर परिजन वापस गांव आ गए। इस बीच गांव में ही श्यामनंदन व वीरचंद्र की तबतक मौत हो गई।

पकड़े जाने के डर से वीरचंद्र के परिवार वाले शव का अंतिम संस्कार कर दिया। लोगों को डर था कि पुलिस लोगों को उल्टे परेशान करेगी। चर्चा है कि गांव में शराब की बिक्री करने वालों लोग भी पुलिस से बचने के लिए शव जला देने के लिए दबाव बना रहे थे। इससे लोग और डर गए। वीर चंद्र के पिता महेश्वर राय ने बताया कि उनका पुत्र दिवाली की रात कहीं से शराब पी कर आया था। शुक्रवार सुबह से उल्टी करने लगा। प्राइवेट में ले गए। डॉक्टर ने पटना ले जाने को कहा। पटना ले जा रहे थे लेकिन रास्ते में मौत हो गई। उन्होंने कहा कि शराब किसने और कहां से पिलाई उन्हें जानकारी नहीं। वीरचंद्र दिवाली पर 2 नवंबर को गुजरात से आया था। छठ बाद वापस जाता।

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