आस्था:पुरानी दुर्गा स्थान में तांत्रिक विधि से माता की पूजा

समस्तीपुर2 महीने पहले
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पुरानी दुर्गा स्थान में बन रहा भव्य प्रतिमा - Dainik Bhaskar
पुरानी दुर्गा स्थान में बन रहा भव्य प्रतिमा
  • 1724 में ढाका से आए घी कारोबारी मंगोमूखो उपाध्याय ने की थी पहलीबार झोपड़ी बनाकर मां की पूजा

297 साल पुराना है। शहर के बहादुरपुर स्थित पुरानी दुर्गा स्थान का तांत्रिक विधि से माता का पूजा। यहां खोईंछा भड़ने वालों की मन्नतें होती है पूरी। 200 सौ वर्षों से अधिक समय से एक ही समान भव्य प्रतिमा का यहां निर्माण हो रहा है। लोग पुरानी दुर्गा स्थान में माथा टेकने के बाद भी दूसरे पूजा पंडालों की ओर रूख करते हैं। ढाई सौ साल से अधिक समय से दुर्गा पूजा की कमान चौधरी परिवार संभाल रहा है। प्रत्येक वर्ष चौधरी परिवार के सभी पटिदार आपस में सहयोग कर समान्य ठंग से पूजा करते हैं।

पूजा के व्यवस्थापक राजीव कुमार चौधरी बताते हैं कि 1734 में ढाका से आये घी कारोबारी मंगो मुखो उपाध्याय समस्तीपुर पहुंचे थे। उन्होंने ही इनेक पूर्वज की जमीन पर झोपड़ी बनाकर दुर्गा पूजा की शुरूआत की थी। करीब साढ सौ साल पूर्व जब वह बुजुर्गावस्था में ढाका लौटने लगे तो उनके पूर्वज हनुमान चौधरी को पूजा की बागडोर दे दी। जिसके बाद संतान विहीन हनुमान चौधरी के घर बच्चों की किलकारी गूंजी थी।

पशु बली देने की है प्रथा, निशा रात्रि को होता पूजा यंत्र का निर्माण

पुरानी दुर्गा स्थान में वर्षों से पशु बली देने की प्रथा चली आ रही है। यहां निशारात्रि को तंत्र विद्या से पूजा की जाती है। पंडित द्वारा पूजा यंत्र का निर्माण किया जाता है अगले दिन अष्टदल कमल बनाया जाता है। पूजा के व्यवस्थापक राजीव बताते हैं पूजा के समय चौधरी परिवार के सभी सदस्य श्रद्धा के साथ उपस्थित रहते हैं।
मास्क में आने वाले ही भर पाएंगी खोइंछा : कोरोना के प्रभाव को देखते हुए इस बार भी गत वर्ष की तरह पूजा पंडाल व मंदिर के अंदर बिना मास्क में इंटरी नहीं मिलेगी। जो महिलाएं मास्क पहन कर आएंगी उन्हें ही खोईंछा भड़ने के लिए मंदिर में प्रवेश मिलेगा।

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