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आरटीआई में खुलासा:आवेदन के महज 4 % लोगों को ही रोजगार दे पाया नियोजनालय

शिवहर13 दिन पहले
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एक ओर सरकार दावे के साथ कोरोना काल में प्रवासी बिहारियों को वापस बुलाकर रोजगार देने की बात कर रही है। वही नियोजनालय द्वारा कोरोना काल में कुल आवेदन का महज चार फीसदी लोगों को ही रोजगार दिया जा सका है। यह खुलासा आरटीआई के द्वारा हुआ है।

आरटीआई कार्यकर्ता मुकुन्द प्रकाश मिश्र ने इस संबंध में विभाग से सूचना मांगी थी। तब आरटीआई रिपोर्ट में बताया गया कि एक जनवरी 2020 से 29 अप्रैल तक कुल निबंधित आवेदकों की संख्या 2260 है। जिसमें से 97 अभ्यर्थियों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। अर्थात कुल आवेदन का चार फीसदी लोगों को ही रोजगार मिल पाया है। दरअसल कभी सरकारी नौकरियों का रास्ता नियोजनालय से होकर जाता था। लेकिन, अब यह जरिया कमजोर होता जा रहा है।

शायद यही कारण है कि बेरोजगार अब इसमें नाम दर्ज कराने को लेकर कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं। जिले में बेशक बेरोजगार युवाओं की संख्या लाखों में है परंतु युवाओं को नियोजनालय से भरोसा उठता जा रहा है। नियोजनालय में नाम दर्ज होने के बावजूद सरकारी नौकरी दिलाने में नियोजनालय विभाग बेकार साबित हो रहा है। हालांकि यह बात अलग है कि यहां पंजीकृत बेरोजगार युवाओं में से कुछ को निजी कंपनियों में नौकरी मिल जाती है।

बताया जाता है कि सरकारी विभागों में नियुक्तियां निकलने पर 1995 तक नियोजनालय से नाम मांगे जाते थे, लेकिन उसके बाद यह सिस्टम बंद हो गया। इसलिए नियोजनालय में नाम दर्ज कराने वालों की संख्या में काफी गिरावट आई है। लाभ नहीं मिल पाने की स्थिति में तीन साल पर नवीनीकरण कराने में भी युवा दिलचस्पी नहीं लेते हैं।

गौरतलब है कि श्रम संसाधन विभाग के तत्वावधान में तकनीकी रूप से प्रशिक्षित एवं अनुभवी बेरोजगार युवाओं को उनकी दक्षता के हिसाब से निजी कंपनियों में रोजगार मिलता है। मेले में शिक्षण प्रमाण-पत्र, जन्म तिथि प्रमाण पत्र समेत विभिन्न कागजातों की पूरी जांच के बाद निजी कंपनियों में अभ्यर्थियों की बहाली की जाती है।

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