शिवहर के DM को हाईकोर्ट का आदेश:20 दिसंबर को बच्ची के साथ कोर्ट में होंगे पेश, पत्नी ने मारपीट का भी लगाया आरोप

शिवहर/पटना2 महीने पहले
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पटना हाईकोर्ट ने शिवहर के जिलाधिकारी की बच्ची की कस्टडी को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए आगामी 20 दिसंबर को दिन के 2.15 बजे तीन वर्ष की बच्ची को पेश करने का आदेश शिवहर के डीएम सज्जन राज शेखर को दिया है।

जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह व जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने शिवहर के जिलाधिकारी की पत्नी जी एस एस सितारा की हैबियस कॉरपस आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश को पारित किया है। खंडपीठ ने डीएम की याचिकाकर्ता पत्नी और जिलाधिकारी सज्जन राज शेखर को भी उक्त तिथि को उपस्थित रहने को कहा है। याचिका में जिलाधिकारी पर याचिकाकर्ता पर मारपीट का आरोप भी लगाया गया है।

बच्चों को ले गए थे डीएम

याचिकाकर्ता की मां ने मारपीट की घटना को लेकर पुलिस में शिकायत भी की थी। कुछ आला अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद याचिकाकर्ता को मुजफ्फरपुर स्थित सर्किट हाउस में रखा गया। इसके बाद शिवहर के जिलाधिकारी सर्किट हाउस आकर अपनी मां के साथ रह रही दोनों नाबालिग बच्चों को ले गए, जिसमें एक इनका डेढ़ - दो वर्ष का बेटा भी शामिल है। याचिकाकर्ता को यह कहकर बच्ची को जिलाधिकारी ले गए थे कि बच्ची को कुछ दिनों के बाद वापस लौटा देंगे, लेकिन अभी तक वापस नहीं किया गया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने क्या दिया तर्क

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सरोज कुमार शर्मा का कहना था कि हिन्दू गार्जियनशिप एक्ट की धारा 6 के अनुसार 5 वर्ष तक के बच्चे को कस्टडी का अधिकार मां को होता है और इसी एक्ट की धारा 13 के अनुसार बच्चे का हित ही सर्वश्रेष्ठ सोच होगा। बच्ची को अभी देखभाल और स्नेह की आवश्यकता है। मां का प्यार सबसे ऊपर माना जाता है।

मां के स्नेह के प्यार और दुलार के आगे बच्चे के लिये कुछ भी नहीं है। एक लेखिका अगाथा क्रिस्टी को उद्धरित करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि एक मां अपने बच्चे के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं का डटकर सामना करती है और बाधाओं को दूर कर देती है। जिलाधिकारी का पक्ष अदालत के समक्ष वरीय अधिवक्ता अशोक चौधरी ने रखा।