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1296 लोगों ने कराए हैं रजिस्ट्रेशन:10 दिवसीय संस्कृत सम्भाषण प्रशिक्षण शिविर शुरू

बिहारशरीफ़/गिरियक7 दिन पहले
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  • संस्कृत सीखना कठिन है यह सोच होगी प्रशिक्षण से दूर -श्रीशदेव पुजारी

सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने में संस्कृत भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका है। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी रही है। यदि हम संस्कृत भाषा का अध्ययन करते है तो भारतीय ज्ञान-विज्ञान में निबद्ध अन्य भारतीय भाषाओं को भी आसानी से जान सकेंगे।

उक्त बातें रविवार को संस्कृत भारती बिहार प्रान्त न्यास के तत्त्वावधान में आयोजित दस दिवसीय आभासिक संस्कृत सम्भाषण वर्ग ऑनलाइन उद्घाटन समारोह में वक्ताओं ने कही । कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बिहार सरकार के कला-संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री डॉ. आलोक रंजन ने कहा कि पूरा विश्व कोरोना महामारी से त्रस्त है। विपदा की इस घड़ी में संस्कृत भारती के कार्यकर्त्ताओं द्वारा निःशुल्क संस्कृत सीखाने का जो कार्य किया जा रहा है, वह सराहनीय है। इस अवसर का लाभ लेकर संस्कृत बोलने का अभ्यास करना चाहिए। हमारे दैनिक जीवन के अधिकांश शब्द भी संस्कृत निष्ठ होते है। मंत्री ने कहा कि संस्कृत भाषा से लोगों की दूरी बढ़ने के कारण समाज में कुरीतियां बढ़ रही है। जिसे समाप्त करने के लिए यह भाषा उपयोगी सिद्ध होगी। डा.गीता कुमारी ने कहा कि संस्कृत देववाणी है। संस्कृत पहले जन भाषा थी लेकिन आज संस्कृत भाषा का हृास होता जा रहा है। अगर संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार सही ढंग से किया जाये तो संस्कृत को आज भी जनभाषा बनाया जा सकता है।

संस्कृत को जनभाषा बनाने पर हो ज़ोर

संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महामंत्री श्रीशदेव पुजारी ने कहा कि संस्कृत को जिस भाषा में मिला के बोलेंगे वह भाषा और भी मधुर हो जाएगी। साथ ही संस्कृत भाषा कठिन है यह संदेह इस प्रशिक्षण से दूर हो जाएगा। ऑनलाइन जुड़े लोगों ने कहा कि संस्कृत भाषा को लोकप्रिय जनभाषा बनाने के लिए ऐसे दस दिवसीय शिविरों का आयोजन हर महीने कराया जाना चाहिए।

सभी भाषाओं की जननी है संस्कृत

संस्कृत भारती नालंदा के डॉ . अभिषेक कुमार द्विवेदी एवं शिक्षिका डॉ. गीता कुमारी ने कहा कि संस्कृत हमारी मातृभाषा थी। विश्व की सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा है, जिसे हम बोलते नहीं है। इस वजह से संस्कृत भाषा मरती जा रही है। ऐसे आयोजनों सें संस्कृत सम्भाषण का प्रयोग कर संस्कृत को सरल एवं मधुर रूप में दोबारा जनभाषा बनाया जा सकता है। इस शिविर में 1296 लोगों ने पंजीकरण कराया है। सात भागों में इन सभी लोगों को विभक्त कर जिला के अनुसार सभी को अगले दस दिनों तक प्रशिक्षण दिया जाएगा । इसके लिए सात-सात शिक्षकों एवं सह शिक्षकों की प्रतिनुयुक्ति की गई है।

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