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सावन पूर्णिमा:रक्षाबंधन पर स्वार्थ सिद्ध और दीर्घायु आयुष्मान का 29 साल बाद बन रहा शुभ संयोग, उसी दिन अंतिम सोमवारी

सीतामढ़ी9 दिन पहले
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  • कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर दुकानें कम खुल रहीं, लेकिन उत्साह में कमी नहीं

भाई-बहन के अटूट प्यार और प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल यह माह के अंतिम सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन इस साल की पांचवी सोमवारी भी पड़ रही है, जो विशेष फलदाई है। ज्योतिष के अनुसार इस साल रक्षाबंधन पर स्वार्थ सिद्ध और दीर्घायु आयुष्मान का शुभ संजोग बन रहा है। ऐसा शुभ 29 साल बाद आया है। जो भाई बहनों के लिए बेहद खास होगा। साथ ही इस साल भद्रा और ग्रह का साया भी रक्षाबंधन पड़ रहा है।

ऐसे में सुबह से लेकर शाम तक भाइयों की कलाई राखियों सजती रहेगी। पंडित वेदप्रकाश शास्त्री बताते हैं कि इस साल रक्षाबंधन पर स्वार्थ सिद्धि योग के साथ सोमवती पूर्णिमा का चंद्रमा, मकर का चन्द्रमा श्रावण उतराषाढ़ और श्रावण नक्षत्र के साथ प्रीति तथा आयुष्मान योग बन रहा है। इससे पहले यह संजोग साल 1991 में बना था। इस संयोग को कृषि क्षेत्र के लिए विशेष फलदाई माना जा रहा है। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 8:29 से रात 8:20 बज के तक है। पंडितों ने बताया कि राखी की थाली में रेशमी वस्त्र, केसर, सरसो, चावल, चंदन और कलावा रखकर भगवान की पूजा करनी चाहिए।

इसके बाद भगवान शिव को अर्पित धागा या राखी भाइयों को कलाई में बांधे। वहीं इस साल कोरोना वायरस महामारी को लेकर शहर में ज्यादा चहल, पहल नहीं दिख रही है। लॉक डाउन के कारण राखियों की दुकान भी नहीं सजी है। अधिकांश दुकानदार बाहर से राखी भी नहीं मंगवाया है।

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