सर्दी बढ़ने से बच्चों में निमोनिया का खतरा:सुबह में हवा बहने से सर्दी तो दोपहर में धूप रहने से बीमारी की आशंका, बच्चों में निमोनिया का खतरा

सीतामढ़ी2 महीने पहले
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साेमवार काे आकाश में छाए हल्के बादल। - Dainik Bhaskar
साेमवार काे आकाश में छाए हल्के बादल।
  • शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों में सावधानी बरतने की है जरूरत

मौसम में हो रहे बदलाव को लेकर बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ गया है। सुबह में ठंडी हवा व दोपहर को धूप में गर्मी होने से संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। सोमवार को सुबह में ठंड हवा चली। कुछ देर के लिए आसमान में बादल भी छाए रहे। वहीं सुबह 10 बजे के बाद धूप में गर्मी आई। सोमवार को न्यूनतम तापमान 16 डिग्री व अधिकतम तापमान 28 डिग्री रिकाॅर्ड किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मौसम में शून्य से 5 साल तक के बच्चों में निमोनिया होने का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए माता-पिता को अपने बच्चों का विशेष देखभाल करने की जरूरत है। सर्दी बढ़ने के साथ ही बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ गया है। डॉ. धनंजय कुमार के अनुसार ऐसे मौसम में 5 वर्ष तक के बच्चों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

दुनिया में होने वाली बच्चों की मौत में 15 प्रतिशत बच्चों की मौत निमोनिया की वजह से होते हैं। कहा कि सर्दियों के मौसम में बच्चों के छींकने व खांसने से फैलने वाला निमोनिया एक संक्रामक बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निमोनिया से ग्रसित होने का खतरा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कुणाल शंकर सिंह ने बताया कि यह रोग शिशुओं की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। निमोनिया से बच्चों को ग्रसित होने की संभावना सर्दियों के मौसम में अधिक होती है। कहा कि गत एक माह से बच्चों को निमोनिया से संक्रमण के आंकड़ों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। ऐसे में जरूरी है कि कम उम्र के बच्चों को सर्दियों के मौसम में बचाव के तौर तरीकों पर गौर करें। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डाॅ. एके झा ने बताया कि यह रोग बैक्टीरिया वायरस या फंगस से फेफड़ों में संक्रमण से होता है। इसमें फेफड़े के वायु के थैलों में द्रव्य मवाद भरकर उसमें सूजन पैदा हो जाती है। जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है।

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