आफत में जिंदगी:बाजपट्टी के बनभिरवा गांव में आवागमन के लिए तीन से चार फीट पानी में उतरना मजबूरी

सीतामढ़ी19 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
बाजपट्टी के वनभिरवा टाेला में पानी पार कर जाते लाेग। नाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को जान-जोखिम में डालकर आना-जाना होता है। - Dainik Bhaskar
बाजपट्टी के वनभिरवा टाेला में पानी पार कर जाते लाेग। नाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को जान-जोखिम में डालकर आना-जाना होता है।
  • अधवारा नदी समूह के सिकाऊ नदी में पानी से फिर घिरा गांव, सीतामढ़ी-पुपरी पथ पर चढ़ा पानी

बाजपट्टी प्रखंड मुख्यालय से महज दो किमी की दूरी पर बसा बनभिरवा गांव के लोगों को पानी हेलना मजबूरी बना हुआ है। इस गांव से सीतामढ़ी-पुपरी एसएच पर महज पांच सौ मीटर आने के लिए चार सौ मीटर के करीब तीन से चार फीट पानी हेलना पड़ता है। बनभिरवा गांव अधवारा समूह के सिकाऊ नदी से घिरा है। हल्की बारिश में भी आठ सौ की आबादी वाले इस गांव के लोगों को पानी हेलना पड़ता है। मुख्य सड़क और गांव के बीच में ही सिकाऊ नदी की धारा है। जिसके कारण लोगों के पास पानी हेलना ही विकल्प होता है। रोजमर्रा की सामग्री के लिए भी इनके पास पानी हेलने के सिवा दूसरा विकल्प नहीं है।
हल्की बारिश में भी नदी उफना जाती है | मो. शाहिद ने बताया कि हल्की बारिश में भी इस नदी में पानी भर जाता है। हमारे पास पानी में उतरकर पार करने के सिवा कोई विकल्प नहीं होता है। आखिर रोजमर्रा का जरूरी सामान तो बाजार से ही लाना होता है। पुल है नहीं। इसके कारण हम सदैव ही मुख्य धारा से कटे रहते हैं। कई बार पुल के लिए प्रशासन और प्रतिनिधि का चक्कर काट चुके हैं, लेकिन गरीबों की कौन सुनता है।
बच्चों का पढ़ाई होता है बाधित| रोबैदा खातून व रोशन खातून ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई छह महीना बाधित रहती है। नदी का कोई भरोसा नहीं है। प्राय: बारिश के मौसम में पानी घंटों में ही भर जाता है और आवागमन बाधित हो जाता है। छोटे बच्चों के लिए स्कूल है, लेकिन बाढ़ बारिश में शिक्षक यदा कदा ही पहुंचते हैं। जबकि उपरी पढ़ाई के लिए बच्चों को गांव से मुख्य सड़क पर आना पड़ता है।

रोजमर्रा का जीवन होता है प्रभावित
मो. सुभान व अबुल हसन ने बताया कि गांव में मजदूर व किसान हैं। बाढ़ के समय काम के लिए भी घरों से निकलना मुश्किल होता है। रोजमर्रा की सामग्री के लिए पानी हेलना पड़ता है। पिछले सप्ताह हल्की बारिश हुई थी। इसके कारण नदी में फिर पानी भर गया। अब हमें तीन से चार फीट पानी चार मीटर में उतरकर ही मुख्य सड़क पर आना पड़ रहा है।

गर्मी में सूखती है नदी, लेकिन बारिश में होती है विकराल
पानी पार करके मुख्य सड़क पर पहुंचे गांव के निवासी मो. फरमान ने बताया कि इस नदी में सामान्य समय में बहुत ही कम पानी रहती है, गर्मी में सूख भी जाती है। लेकिन बारिश व बाढ़ के समय इसका विकराल रूप रहता है। हमलोग इसके किनारे है। कुछ घरों में भी पानी घूस जाता है। गांव के लोगों को छह महीना परेशानी झेलना पड़ता है। पानी कम होने पर चचरी पुल बनाया जाता है, वहीं बाढ़ के दौरान प्रशासन ने नाव दिया था। लेकिन, इस बार के पानी में हमें तीन से चार फीट पानी हेलना पड़ रहा है। नाव नहीं दिया गया है।

खबरें और भी हैं...