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हिंदी दिवस:अनगिनत बाधाओं के बावजूद हिंदी विश्वभर में बड़ी तेजी से फैल रही है, हिंदी भाषा विश्व के कई देशों में बोली जाती है : डीसीएलआर

सीतामढ़ी13 दिन पहले
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  • कहीं विचार गोष्ठी तो कहीं कवि सम्मेलन का आयोजन, हिंदी भाषा को अनिवार्य भाषा बनाने को लोगों को जागरूक करने की जरूरत

हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को कहीं विचार गोष्ठी तो कहीं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिंदी भाषी लोगों ने रक्तदान कर लोगों को अपने मातृभाषा को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। मुख्यालय डुमरा स्थित एक शिक्षण संस्थान के परिसर में सोमवार को सेवानिवृत प्राचार्य रामशंकर मिश्र की अध्यक्षता में विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डीसीएलआर पुपरी ललित कुमार सिंह ने कहा कि अनगिनत बाधाओं के बावजूद हिंदी बड़ी तेजी से अपना पंख पसार रही है।

इसकी उड़ान की चपेट में आज पूरा विश्व है। उन्होंने कहा कि भारत की मातृभाषा हिंदी है लेकिन हिंदी भाषा विश्व के कई देशों में बोली जाती है। हिंदी भाषा मधुर व लोकप्रिय है। वहीं वक्ताओं ने कहा कि हिंदी अपने ही देश में बेगानी बनती जा रही है। उन्हाेंने हिंदी भाषा को अनिवार्य भाषा बनाने के लिए समाज के लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। मौके पर अनिता सिंह, नवल किशोर मिश्र, राजकुमार गुप्ता, रामबाबू सिंह आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।

हिंदी तो सच में मंदिर की पावन बंदगी है ...
इधर साहित्य परिषद के तत्वावधान में गीतकार गीतेश की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन हुआ। गीतकार गीतेश की रचना “हिंदी तो सच में मंदिर की पावन बंदगी है, यह भाषा तो हमारी सांस धड़कन जिंदगी है, जिनकी फितरत में फकत बनावटीपन है, वैसे लोगों को होती हिन्दी से शर्मिन्दगी है..., से कवि सम्मेलन का आगाज हुआ। रजनीश रंजन की कविता “जहां सिर्फ एक अक्ष ही मौन से संवाद कर ले, हिंदी उस अनंत भावनाओं की लंबी फेहरिस्त है...इद्रजीत लाल कर्ण की रचना “ये हिंदी हमारी हम हिंदी की जयकार करे..., पंकज कुमार की रचना “जीवन से हर मोड़ पे यूं ही लोग बदलते रहते है जर्जर दिल की दीवारों से तस्वीर बदलते रहते है..., कृष्णनंदन लक्ष्य की रचना “सबसे बड़े वे धनवान होते है जिनके सर पे मां बाप के वरदान होते है..., सुरेश लाल कर्ण की रचना “क्षणिक मिलन के उन लम्हों को फिर से तुम याद दिला जाना...,रामाशंकर मिश्र की “मौज में जिंदगी है भंवर ही भंवर मुश्किलों से भरा जिंदगी का सफर... ने हिंदी की महता एवं गरिमा पर प्रकाश डाला।

रक्तदान कर हिंदी भाषा के प्रति समर्पण का दिया सुझाव | हिंदी दिवस के अवसर पर कर्तव्य सेवा संघ के सचिव सुधीर मिश्र ने रक्तदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। यह मधुर व लोकप्रिय है। यह हमारे देश ही नहीं पूरे विश्व की भाषा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक होने के कारण हमलोगों को हिंदी के प्रति समर्पित भाव हाेनी चाहिए। उन्हाेंने हिंदी दिवस को यादगार बनाने का सुझाव दिया।

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