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लापरवाही:एमसीएच में 3 घंटे के इंतजार के बाद पहुंची डॉक्टर, 22 गर्भवतियों का हुआ अल्ट्रासाउंड

सीतामढ़ी12 दिन पहले
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सदर अस्पताल की एमसीएच बिल्डिंग मे गेट पर बच्चे के साथ बैठे अभिभावक। - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल की एमसीएच बिल्डिंग मे गेट पर बच्चे के साथ बैठे अभिभावक।
  • बगैर मास्क के पर्ची काउंटर पर लोगों की लगी थी भीड़, कोरोना गाइडलाइन का नहीं हो रहा पालन

सदर अस्पताल स्थित मातृ शिशु अस्पताल को आधुनिक व्यवस्था से लैस किया गया है। लेकिन, डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को मातृ शिशु अस्पताल में अल्ट्रासांउड कराने को लेकर गर्भवती माताओं को तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। अपराह्न के 12:30 बजे डॉ. रीता महतो पहुंची। इसके बाद महज 22 गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड किया गया। मौसम में बदलाव को लेकर बच्चा मरीजों की संख्या अधिक रही। ओपीडी में कुल 90 बच्चों का इलाज किया गया लेकिन, इसमें एक भी बच्चे बुखार से पीड़ित नहीं मिले, जिसे एमसीएच के पीडिया वार्ड में भर्ती कराया जा सके। वहीं पर्ची काउंटर पर बगैर मास्क के ही लोग कतारबद्ध दिखे। कोराेना गाइडलाइन का अनुपालन कराने को लेकर न तो कोई गार्ड दिखे और न ही कोई कर्मी। सुबह से ही गर्भवती महिला डॉक्टर के आने का करती रही इंतजार: मंगलवार को एमसीएच अस्पताल में गर्भवती महिलाएं सुबह से ही परिजनों के साथ पहुंची थी। अल्ट्रासाउंड को लेकर अस्पताल में सुबह 9 बजे से ही डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही थी। अपराह्न के 12:30 बजे डॉ. रीता महतो पहुंची। इसके बाद रजिस्ट्रेशन कराकर कतारबद्ध महिलाओं को एक-एक करके अल्ट्रासांउड किया गया। इनमें मात्र 22 गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड किया गया। शेष महिलाओं को अगले दिन आने की सलाह दी गई।

पर्ची काउंटर पर बगैर मास्क के लोगों की लगी थी जमघट

इधर पर्ची काउंटर पर लोगों की भीड़ लगी थी। बगैर मास्क के लोग पर्ची कटाने के लिए बिना सोशल डिस्टेंसिंग बनाए ही कतारबद्ध खड़े थे। कोरोना गाइडलाइन का अनुपालन कराने को लेकर न तो कोई गार्ड दिखा, और न ही कोई कर्मी। ऐसे में कोरोना गाइडलाइन का अनुपालन नहीं किया जा रहा था।

इलाज को आए 90 बच्चों में बुखार से पीड़ित एक भी नहीं

मौसम में बदलाव को लेकर बीमार बच्चों की संख्या बढ़ रही है। मंगलवार को ओपीडी में मौसमी बीमारी से ग्रसित कुल 90 बच्चे का इलाज किया गया। लेकिन, इनमें से एक भी बच्चे गंभीर रूप से बुखार से पीड़ित नहीं मिले। इन बच्चों में अधिकांश बच्चे सर्दी, खांसी व अन्य बीमारी के ग्रसित मिले।

अस्पताल में मात्र पांच डॉक्टर रोटेशन पर करते हैं काम

अस्पताल प्रबंधक शंभू शरण के अनुसार सदर अस्पताल में मात्र पांच डॉक्टर हैं । इसके सहारे रोटेशन के आधार पर बीमारियों का इलाज कराया जाता है। अल्ट्रासाउंड के लिए अलग से काेई डॉक्टर नहीं है। जिसके कारण रोटेशन के आधार पर इन्हीं डॉक्टरों से काम लिया जा रहा है।

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