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बदहाली:नया टोला में बांस के सहारे हो रही बिजली की आपूर्ति, खुले में शौच करने जाते हैं 2 हजार लोग

सीतामढ़ी9 दिन पहले
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नगरपरिषद के वार्ड-21 मे बांस के सहारे लटका बिजली का तार। - Dainik Bhaskar
नगरपरिषद के वार्ड-21 मे बांस के सहारे लटका बिजली का तार।
  • पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट, शौचालय, स्कूल व सामुदायिक भवन की व्यवस्था नहीं होने से लोगों में नाराजगी
  • वार्ड सदस्य बोले- मूलभूत सुविधा भी नहीं, राेशनी के लिए 42 बिजली पोल की है जरूरत

नगर क्षेत्र के वार्ड 21 की पूरी आबादी 5 हजार के करीब है। इसमें 18 सौ लोग नगर परिषद के होने वाले चुनाव में वोटर हैं। जिसमें से एक हजार वोटर नया टोला (स्लम बस्ती) के रहने वाले हैं। वैसे बस्ती की आबादी दो हजार के करीब है। इसके बावजूद आज तक यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

लोगों को स्वच्छ पेयजल और सुचारू रूप से बिजली सेवा भी नहीं मिल रही है। बस्ती में एक भी बिजली का खंभा नहीं है। लोग बांस-बल्ले के सहारे बिजली का तार खिंचकर घर में राेशनी करते है। नियमित रूप से साफ-सफाई नहीं होने से पूरे बस्ती में जहां-तहां गंदगी फैली रहती है। बस्ती के लोगों के घरों में शौचालय तक नहीं है।

इससे मजबूरन लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है। रविवार को भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए हमनें बस्ती में रह रहे लोगों की परेशानी और क्षेत्र में विकास की तस्वीर कितनी बदली है, जानने की कोशिश की। स्लम बस्ती, जो नया टोला के नाम से जाना जाता है। इस भू-खंड पर 1972 से लोग स्थाई और अस्थाई घर बनाकर रहते आ रहे है। बेनामी भू-खंड होने के कारण किसी ने आपत्ति नहीं की। इस कारण बस्ती का क्षेत्रफल बढ़ता गया। बस्ती के बसे अब 50 वर्ष होने को है। लेकिन, बस्ती के लोगों की तकदीर नहीं बदल सकीं। इससे लोगों में सरकार व जिला प्रशासन के प्रति नाराजगी है।

बांस-बल्ले के सहारे घर में रौशनी, बिजली पोल लगाने की मांग

स्थानीय निवासी सरोज, दिनेश, पिंटु, विकास आदि लोगों ने बताया कि बस्ती के अधिकतर लोग ज्यादा पढ़े-लिखें नहीं है। दिहाड़ी मजदूरी करते है। बस्ती में एक भी बिजली का खंभा नहीं लगाया गया है। मजबूरन लोग बांस-बल्ला के सहारे घर में बिजली का तार खिंचकर घर में राेशनी कर रहे है। बारिश होने पर चिंगारी निकलती रहती है। बांस में करंट दौड़ता रहता है। कई लोगों को करंट भी लगता है। उन्होंने बस्ती में बिजली के खंभे लगाने की मांग की।

खुले में शौच जाने को मजबूर लोग

बस्ती के एक भी घर में शौचालय नहीं बना हुआ है। बेनामी भू-खंड पर घर होने के कारण लोगों को शौचालय बनाने के लिए मिलने वाली राशि भी नहीं दी गई। इससे 500 परिवार के लोग रेलवे लाइन के किनारे खुले में शौच करने को मजबूर है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जमीन की रसीद नहीं होने के कारण शौचालय निर्माण के लिए राशि नहीं मिल सका। उन्होंने बस्ती में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराने की मांग की।

जहां-तहां गंदगी फैले रहने से बीमारी बढ़ने की आशंका

बस्ती में कई स्थानों पर स्थाई नाली तक नहीं बनाई गई है। लोग जैसे-तैसे मिट्टी काटकर पानी का बहाव कर रहे है। सार्वजनिक कचरा पेटी तक नहीं रखा गया है। इससे बस्ती में जहां-तहां गंदगी पसरा रहता है। उसी कचरे में मवेशियों, मुर्गी अौर बतख विचरण करते रहते है। वहीं, आसपास बच्चें खेलते है। गंदगी के बीच रहने के कारण यहां के लोगों में बिमारी भी बढ़ी है। फॉगिंग मशीन से केमिकल का छिड़काव तक नहीं किया जाता। इससे बच्चों में अक्सर मलेरिया, डायरिया व कुपोषण आदि बिमारी से ग्रसित होने की शिकायत आती रहती है।

1.5 करोड़ रुपए से पीसीसी सड़क, नाला व स्लैब बिछाने का हुआ काम : वार्ड सदस्य

इस बावत वार्ड सदस्य संजू गुप्ता ने बताया कि उनके कार्यकाल में 1.5 करोड़ रुपये से वार्ड में विभिन्न स्थानों पर पीसीसी सड़क, नाला व सलैब का काम किया गया है। बेनामी भू-खंड होने के कारण स्लम बस्ती में राेशनी के लिए बिजली के खंभे, शौचालय, सामुदायिक भवन, प्राइमरी स्कूल नहीं बनाया जा सका। पूरे बस्ती में राेशनी के लिए 42 बिजली पोल की जरूरत है। उन्होंने बस्ती में उचित प्रबंधन के लिए कई बार नगर निकाय विभाग, डीएम व नगर परिषद की बोर्ड मीटिंग में भी प्रस्ताव रखा। लेकिन, विकास कार्य तो दूर जनसंख्या बढ़ने से बस्ती की हालत और भी बद्दतर होती जा रही है।

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