सम्मान:प्रसिद्ध अमेरिकी रसायन शास्त्री पारसनाथ प्रसाद का किया गया सम्मान

सीतामढ़ीएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
सम्मानित होते भारतीय मूल के अमेरिकी रसायन शास्त्री पारस नाथ प्रसाद व उनकी पत्नी सुमी। - Dainik Bhaskar
सम्मानित होते भारतीय मूल के अमेरिकी रसायन शास्त्री पारस नाथ प्रसाद व उनकी पत्नी सुमी।
  • 20 साल बाद अमेरिका से आए प्रसाद ने अपनी माटी काे किया नमन, पत्नी सुमी के साथ जानकी स्थान और पुनौराधाम में पूजा-अर्चना की

लायंस क्लब सीतामढ़ी वेस्ट की अोर से नगर के रिंग बांध स्थित एक सभागार में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान भारतीय मूल के प्रसिद्ध अमेरिकी रसायन शास्त्री पारसनाथ प्रसाद व उनकी पत्नी सुमी को सम्मानित किया गया। वे नगर के मेहसौल चौक निवासी शम्भू नाथ प्रसाद एवं प्रो. प्रह्लाद प्रसाद के बड़े भाई हैं। वे करीब 20 साल बाद सीतामढ़ी आए हैं। उन्हाेंने बताया कि वे जहां भी होते हैं, अपनी माटी को नमन करते रहते हैं। बताया कि सीतामढ़ी आते ही पत्नी के साथ जानकी स्थान और पुनौराधाम जाकर पूजा-अर्चना की। संस्था के अध्यक्ष संजय कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष गणेश शर्राफ, उपाध्यक्ष डाॅ. सुरेश कुमार, डाॅ. केएन. गुप्ता, लक्ष्मी नारायण गुप्ता, सुकेश सोनी, सुमंत कुमार, अर्चना कुमारी, आदित्य राज द्वारा संयुक्त रूप से फूलों का गुलदस्ता, जानकी उद्भव भेंट कर और शाॅल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

साथ ही फुलवारी द किड्स होम विद्यालय की प्राचार्या रेखा शर्मा द्वारा अपने हाथों से बनाई पेंटिंग भेंट की गई। पारस नाथ प्रसाद (जन्म 1946) एक भारतीय रसायन शास्त्री हैं। वह बफ़ेलो विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान, भौतिकी, चिकित्सा और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विभागों में विशिष्ट प्रोफेसर हैं। साथ ही लेज़र, फोटोनिक्स और बायोफोटोनिक्स संस्थान के कार्यकारी निदेशक हैं। 2014 में प्रसाद ने “कैंसर निदान और उपचार के लिए चुंबकीय और लेजर-सक्रिय नैनोकणों के उपयोग को विकसित करने” में अपने काम के बदौलत बीयू का पहला इनोवेशन इम्पैक्ट अवार्ड प्राप्त किया।

कम्प्यूटर और तकनीक का अध्ययन बढ़ाएं युवा, मदद को हूं तैयार : प्रसाद

अमेरिकी रसायन शास्त्री पारस नाथ प्रसाद ने बताया कि सीतामढ़ी में युवाओं का भविष्य उज्जवल है। कम्प्यूटर और तकनीक के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। युवाओं को इस क्षेत्र अध्ययन बढ़ाना चाहिए। प्रतिभावान युवाओं को हर संभव मदद करने को तैयार हूं। यदि कोई अमेरिका आते हैं और किसी तरह की परेशानी होती है, तो मुझसे मदद ले सकते हैं। बताया कि करीब 40 साल पहले जब वे अमेरिका गए थे, तो वहां काफी संघर्ष करना पड़ा था। तब वे वहां की भाषा नहीं समझ पाते थे। बाजार में खरीदारी के समय वे मांगते थे कुछ तो कुछ और दिया जाता था। पर, उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। संघर्ष करते हुए यहां तक पहुंचे हैं। आज उनकी उम्र करीब 75 साल है। उनकी पत्नी दक्षिण कोरिया की है। उनका काफी सहयोग मिलता है।

खबरें और भी हैं...