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खेतीबाड़ी:धान की फसल में लग रहा कीड़ा, तना व बाली को काटकर बर्बाद कर रहा है, किसान कीटनाशक का करें छिड़काव

सीतामढ़ीएक महीने पहले
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  • कृषि विज्ञान केन्द्र बल्हा के वैज्ञानिक ने पुपरी, बाजपट्टी, चोराेत, नानपुर, सुरसंड में खेतों में लगे धान देखा

कृषि विज्ञान केन्द्र बल्हा के फसल वैज्ञानिक सच्चिदानन्द प्रसाद ने पुपरी, बाजपटटी, चोरोत, नानपुर, सुरसंड आदि प्रखंडों में जाकर खेतों में लगे धान के फसल का निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगह फसल में कीट लगा हुआ पाया गया। साथ ही खरपतवार समेत दूसरे तरह की परेशानी भी नजर आया। निरीक्षण के क्रम में उन्होंने बताया कि अभी धान के फसल में कीट एवं बीमारी दिखाई दे रहा है। इससे बचाव के लिए तत्काल कदम उठाये जाने की जरुरत है। इस दौरान किसानों ने उनसे कई तरह के सवाल किये। फसल वैज्ञानिक ने किसानों के सवालों का जवाब देते हुए उन्हें जागरूक किया। फसल वैज्ञानिक सच्चिदानन्द प्रसाद ने कहा कि धान में अगर पत्तियों को लपटे हुए लपेटक कीट दिखाई दे तो एसिटेट 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या डाईमेथोएट 1 एमएल प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करें। कहा कि सफेद रंग का छोटा कीट भी धान में लग रहा है। यह जड़ के ऊपर एवं तना को काट देता है।

जिससे पौधा सूखने लगता है। जिसे तना छेदक कीट कहते है। उसके लिए किसान कारटाफ हायड्रो क्लोराइड 10 किलो प्रति एकड़ या क्लोरोपायरिफोस-50 को 2 एमएल प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करें। अगर काले चमकीले रंग का हिस्पा कीट दिखाई दे, तो ट्राईजोफॉस 2 एमएल प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि जिस फसल में बाली निकल चुका है तथा दाने में दूध भरने की अवस्था है, जिसमें गन्धी बग दूध को चुस कर दाने को खखरी बना देता है। उसके लिए माला थियान या फॉलीडौल 10 किलो प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें। बीमारी के रूप में अगर पत्तियों का रंग हल्का लाल एवं पत्तों पर बूंद-बूंद धब्बा जो बीएलबी प्रतीत होता हो, उसके लिए स्ट्रेप्टोसायक्लीन 1 किलो प्रति 5 लीटर पानी एवं कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करें। अगर पत्तियों पर नाव के आकार का धब्बा दिखाई दे, जो ब्लास्ट रोग प्रतीत होता हो, उसके लिए प्रोपिकोनाजोल 1 एमएल प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करें।

धान के खेत में पानी रहना चाहिए : सच्चिदानन्द
उन्होंने कहा कि अभी धान के फसल पर ध्यान देने की जरूरत है। किसान धान के फसल में कीट एवं बीमारी का उचित प्रबंधन कर अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए किसान को लगातार खेतों का जायजा लेते रहना होगा। फसल को देखते रहने से बीमारी का पता चलता रहता है। साथ ही खेतों में पानी की मात्रा पर भी ध्यान देना चाहिए। धान के खेती में पानी का होना बेहद जरुरी होता है। इसलिए बेहतर उपज के लिए खेतों में नमी बनी रहनी चाहिए। मौके पर मत्स्य सहायक प्रकाश चन्द्र भी उपस्थित थे।

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