मां काली का सिद्ध स्थल:यहां रोज लगता है मां का दरबार, नवरात्र में रहती भीड़

सीतामढ़ी12 दिन पहले
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शंकर चाैक स्थित काली मंदिर में स्थापित प्रतिमाएं। - Dainik Bhaskar
शंकर चाैक स्थित काली मंदिर में स्थापित प्रतिमाएं।
  • शंकर चौक के काली मंदिर में काले पत्थर व सीमेंट से बनी हैं दो भव्य प्रतिमाएं

मुख्यालय डुमरा स्थित शंकर चौक पर स्थित काली मंदिर में शारदीय नवरात्रा को लेकर भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी है। वैसे तो यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, 60 के दशक में यहां खाली जमीन थी। जहां पाकड़ का एक विशाल पेड़ था। साल 1961 में इस पेड़ के नीचे डुमरा कोर्ट में कार्यरत अवधेश कुमार आनंद ने गुंबदनुमा मंदिर बनवाकर शिवलिंग की स्थापना की। इसके बाद सीतामढ़ी शहर के रामलखन पेंटर से माता काली की प्रतिमा बनवाई। मंदिर बनने के बाद उक्त गहवर में ही रामकृपाल बाबू ने बनारस से प्रतिमा लाकर स्थापित की।

मंदिर परिसर में बनाया जा रहा अतिथि गृह, मां की महिमा अपरंपार

पूर्व डुमरा नगर पंचायत के अध्यक्ष शिवकुमार अग्रवाल द्वारा मंदिर परिसर में अतिथि गृह का निर्माण कराया जा रहा है। कहते हैं माता काली की महिमा अपरंपार है। काले पत्थर और सीमेंट निर्मित माता काली की ये दोनों प्रतिमाएं भव्य हैं।

^माता की पूजा तथा आरती प्रतिदिन सुबह-शाम होती है। इसमें स्थानीय लोगों के अलावा बाहर से आए भक्त भी शामिल होते हैं। यहां काले पत्थर और सीमेंट निर्मित माता काली की दो प्रतिमाएं हैं। प्रतिदिन दोनों प्रतिमा की शृंगार पूजा होती है। यहां साल में चार बार विशेष नवरात्र की पूजा की जाती है।
- रामश्रेष्ठ गिरि, पुजारी, काली मंदिर, डुमरा।
^मंदिर के संचालन और व्यवस्था में स्थानीय लोगों का अहम योगदान रहता है। विशेष आयोजनों पर स्थानीय के साथ ही बाहर के श्रद्धालु भी खुले दिल से सहयोग करते हैं। पुजारी व मंदिर के सेवक के रहने व उनके भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
- पंकज कुमार सह संरक्षक, काली मंदिर।

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