पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अधिकारी कर रहे हैं निगरानी:बागमती नदी के कटाव से जमला गांव के लोगों में दहशत मात्र 800 मीटर दूर है नदी की धार, लोग कर रहे पलायन

सीतामढ़ी21 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
नदी का कटाव देखते ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
नदी का कटाव देखते ग्रामीण।
  • बार-बार शिकायत करने के बाद अब कटाव रोकने के लिए विभाग कर रहा है सुरक्षात्मक व्यवस्था

बाढ़ के बाद पानी घटने के साथ ही बागमती नदी का कटाव में तेजी आ गई है। प्रखंड क्षेत्र स्थित बड़हरवा पंचायत के जमला गांव में बागमती नदी के कटाव से लोग दहशत में हैं। कटाव में तेजी को देखते हुए अब लोगों ने पलायन भी शुरू कर दिया है। हालांकि बार-बार शिकायत के बाद अब प्रशासन द्वारा कटाव की रोकथाम को लेकर कार्य शुरू कर दिया गया है, बावजूद लोगों में सुरक्षात्मक कार्य को लेकर संतुष्टी नहीं है। नदी की धार बाढ़ से पहले जहां दो किलोमीटर की दूरी पर थी अब महज आठ सौ मीटर पर पहुंंच चुकी है। लोगों में इस बात का भी आक्रोश है कि कटाव का निरीक्षण करने सीतामढ़ी जिला के प्रभारी मंत्री मो जमा ख़ां, शिवहर सांसद रमा देवी, स्थानीय विधायक मोतीलाल प्रसाद जलसंसाधन विभाग के अधिकारी समेत अन्य पदाधिकारी पहुंच चुके हैं।

सभी लोगों ने ग्रामीणों को इस आफत से बचाने के लिए शीघ्र काम शुरू करवाने के साथ ही कटाव की रोकथाम को लेकर ठोस पहल करने का आश्वासन दिया। जब खतरा शिर चढ़ बोलने लगी तो काम शुरू किया गया है, लेकिन काम की गति व व्यवस्था प्रयाप्त नहीं देखा जा रहा है। कटाव धीरे धीरे गांव की घनी आबादी तक पहुंचे की ओर बढ़ रही है। जिससे लोगों में दहशत है और लोग गांव भी छोड़कर अन्य गांवों एवं अपने संबंधियों के यहां पनाह लेने लगे है। अभी भी इस नाजुक स्थिति प्रशासन व प्रतिनिधि गंभीरता से नहीं लेकर केवल खानापूर्ति में लगे हैं। जिससे दिनों दिन स्थिति बद से बदत्तर की ओर बढ़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर स्थिति यहीं बनी रही तो गांव के लोगों को खड़े होकर अपने आशियाने को नदी के समाते देखना होगा।

प्रतिवर्ष कटते रहे खेत कम होती रही किसानों की जाेत की भूमि

जमला गांव के कटाव स्थल पर टीम पहुंची। जहां लोग कटाव कार्य में लगे मजदूरों को देखा। वे बांस कटाव स्थल पर गारने के साथ ही कटाव को रोकने के लिए बालू की बोरिंया उसमें डाल रहे थे। गांव के लोग भी वहां मौजूद थे। बोरिंया गहरे पानी में समायी जा रही थी। मजदूरों ने बताया कि बांस के बल्ले से रूकावट होगी तथा उसमें बालू की बोरियां भरने से कटाव रूक जाएगी। वहीं ग्रामीण गणेश राय ने बताया कि अगर एक स्थान पर ही कटाव रहेगा तो कारगर हो सकता है, लेकिन मात्र इतनी कवायत से गांव को बचाना मुश्किल होगा। इसके लिए नदी के पूर्वी धार से कटाव रोकने के लिए तीन से चार किलोमीटर तक यही करना होगा। नहीं तो सभी बेकार होगा। धारा पुन: रूकावट के आगे या पीछे कटाव शुरू करेगी।

नेपाल के ब्रह्मपुरी में बांध बनने के कारण अब नदी की धार पूर्व की ओर बहने लगी

ग्रामीण राजेश कुमार यादव ने बताया कि पहले नदी की धारा प्राय: पश्चिम की ओर बढ़ती थी। जिससे नेपाल का ब्रह्मपुरी व आसपास का इलाका प्रभावित रहता था। लेकिन, नेपाल के क्षेत्र में बड़ा व मजबूत बांध बनाया गया है। इसके कारण अब नदी की धार पूर्व की ओर बहने लगी है। कभी यह धारा गांव से पांच से छह किलोमीटर दूर थी, जो दो किलोमीटर पहुंच गई। इस बाद बाढ़ के दौरान भी कटाव जारी रहा, अब धरा सात से आठ सौ मीटर पर पहुंंच चुकी है और कटाव जारी है।

^कटाव पर नियंत्रण करने के लिए प्रशासन पूरी तरह सजग है। जमला में भूमि की कटाव रोकने को लेकर कार्य जारी है। विभागीय अधिकारी भी कटाव व कार्य पर निगरानी बनाए हुए हैं, शीघ्र ही कटाव पर रोक लग जाएगी।
- रामजी प्रसाद केसरी, सीओ, सुप्पी।

खबरें और भी हैं...