अनुशंसा:निष्पक्ष महिला एजेंसी से जांच कराने की अनुशंसा

सीतामढ़ी2 महीने पहले
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  • मामले में पीयूसीएल की जांच रिपोर्ट भेजी गई

परिहार थाना क्षेत्र के गोरहारी गांव में पंचायत चुनाव के दिन गत 29 नवम्बर की रात में पुलिस द्वारा अल्पसंख्यकों तथा अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोगों के घरों में घुसकर की गई मारपीट, तोड़फोड़ तथा पुलिस ज्यादती पर पीयूसील की चार सदस्यीय टीम की जांच रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग तथा बिहार सरकार को भेज दी गयी है। जांच टीम प्रभावित गांव जाकर दर्जनों पीड़ित तथा घायल महिला-पुरूषों से बात कर तथा क्षतिग्रस्त संपति का मुआयना की। इसमें पाया गया कि 60-70 पुलिसकर्मियों ने बेरहमी से मारपीट कर करीब 50 लाख की सम्पत्ति को नष्ट कर दिया गया। इसे अंग्रेजी राज की याद ताजा हो गयी। प्राथमिकी में फर्जी मतदाता की बात भी सत्य प्रतीत नहीं होती। क्योंकि मतदाता के नाम और उपनाम को लेकर विवाद हुआ था।

उसमें चैलेंज करने वाले एजेंट ने प्रक्रिया के तहत कोई चैलेंज राशि भी जमा नहीं किया हुआ है। दिन में डीएम तथा एसपी के पहुंचने के बाद पुनः रात्रि में घटना घटित होना यह साबित करता है कि वरीय अधिकारियों के निर्देश के बगैर पुलिस इतनी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे सकती है। चुनाव में मतदाताओं के सामान्य झड़प को पुलिस या दण्डाधिकारी समझा-बुझाकर चुनावी प्रक्रिया को शुरु कराने में विफल रहे और सैकड़ों मतदाता मतदान करने से वंचित हो गये। कहा गया कि बगैर महिला पुलिस के पुरुष पुलिस द्वारा अर्द्ध रात्रि में घरों में घुसना, महिलाओं के साथ बदसलूकी उच्चतम न्यायालय के आदेश की खुली अवहेलना है। जांच टीम में पीयूसील बिहार के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. आनन्द किशोर, पूर्व महासचिव तथा राज्य समिति सदस्य प्रो. किशोरी दास, राज्य समिति सदस्य ब्रजमोहन मंडल, जिला समिति सदस्य अधिवक्ता मो. शेराज अहमद शामिल थे।

आरक्षी अधीक्षक को जिम्मेदार माना गया

जांच टीम ने अपने सुझाव में डीएम तथा आरक्षी अधीक्षक को जवाबदेह मानते हुए उनके तबादले के साथ विधान सभा या विधान परिषद की कमेटी से घटना की जांच कराने, घटना को अंजाम देने वाले सभी अधिकारियों तथा पुलिसकर्मियों को सीआरपीसी तथा आईपीसी की धारा में मुकदमा दर्ज कर उनपर कार्रवाई करने, सभी गिरफ्तार निर्दोष लोगों को रिहा करने तथा सरकार द्वारा मामला वापस लेने, बर्बादी का मूल्यांकन कर इसकी भरपाई घटना को अंजाम तथा आदेश देनेवाले अधिकारियों तथा पुलिसकर्मियों के वेतन से कराने, महिलाओं के साथ बदसलूकी तथा दुष्कर्म के प्रयास की जांच किसी निष्पक्ष महिला एजेंसी से कराने की अनुशंसा की गई है।

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