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परेशानी:इतनी सरकारें आईं-गईं, जनता अब भी चचरी पुल के भरोसे

सीतामढ़ीएक महीने पहले
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पुपरी के बाजितपुर बौरा पंचायत के साथ ही आसपास के गांवों के लोगों का बुढ़नद नदी पर स्थित गंगबारा घाट पर बना चचरी पुल ही सहारा बना हुआ है। हालांकि बाढ़ बरसात में यह भी साथ नहीं देता है। पानी के बहाव में यह चचरी पुल भी प्राय: बह जाता है। तब यहां के आसपास के लोगों को करीब सात से दस किलोमीटर का चक्कर लगाकर अपने गांवों से पुपरी और पुपरी से गांव जाना मजबूरी बन जाता है। इसी गंगबारा घाट के पुल से बाजितपुर बौरा के साथ ही आसपास के रजघट्टा, रजिया, गंगबारा, बर्री चौगमा के लोग भी आते जाते हैं। इस चचरी पुल से प्रतिदिन करीब पांच से सात सौ लोग आते जाते हैं। इतना ही नहीं इसी पुल होकर मजबूरी में साईकिल व बाइक सवार भी गुजरते हैं। बाढ़ व बरसात में यह सहारा भी आसपास के लोगों के लिए बंद हो जाता है।

बांस व बल्लियों से बनी यह पुल अधवारा समूह की इस बुढ़नद नदी के धार में प्राय: बह जाती है। लेकिन प्रतिवर्ष यहां के स्थानीय लोग एवं आसपास के लोग आपसी सहयोग कर इसे बनाते हैं। हालांकि इसे लेकर स्थानीय लोगों का सदैव ही जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन से यहां पुल की मांग करते रहे हैं। लेकिन इन्हें आश्वासन तो मिला लेकिन धरातल पर अब तक कोई पहल नजर नहीं आई है। स्थानीय निवासी फकरे आलम, दीनेश कुमार, नीरज पासवान ने बताया कि यहां पर पुल निर्माण के लिए विधान पार्षद देवेश चंद्र ठाकुर ने अनुसंशा भी की थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका है। इस घाट पर पुल की कमी सदैव ही खलती है। चचरी पुल बनाने में हर साल 40-50 हजार रुपये का खर्च आता है।

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