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लोगों में आक्रोश:आजादी की लड़ाई में शहीद होने वाले वीर सपूतों से जुड़े स्थलों का नहीं हो सका विकास, लोगों में आक्रोश

सीतामढ़ी2 महीने पहले
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  • ग्रामीणों ने प्रशासन पर गांव को उपेक्षित किए जाने का आरोप लगाया, सिर्फ मिलता आश्वासन

आजादी की लड़ाई में शहीद होने वाले वीर सपूतों से जुड़े स्थलों का विकास नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर लोगों में आक्रोश है। तरियानी छपरा के ग्रामीण राकेश कुमार सिंह, सुभाष प्रसाद सिंह, समुंद्री देवी, उमाशंकर सिंह, भाजपा नेता अखिलेश कुमार सिंह, पंकज कुमार सिंह, मुखिया श्याम बाबू सिंह, राइडर राकेश कुमार सिंह, भरत शाह, मुन्ना कुमार सिंह, लोहा सिंह, अरुण कुमार सिंह, चंदन कुमार सिंह सहित दर्जनों ग्रामीणों ने प्रशासन पर गांव को उपेक्षित किये जाने का आरोप लगाया। बताया कि आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों को बलि देने वाले 10 वीर सपूतों के स्थल का अभी तक विकास नहीं हो पाया है। इन लोगों ने बताया कि 30 अगस्त को प्रत्येक साल शहीद दिवस के मौके पर जिला से अधिकारी एवं पदाधिकारी यहां पहुंचकर लंबे-लंबे आश्वासन देकर चले जाते हैं।

उसके बाद फिर कोई सुधि लेने वाला नहीं होता है। उन्होंने बताया कि एमपी, एमएलए भी चुनाव के समय आकर भाषण कर वीर सपूत की याद में कई आश्वासन देकर और स्थल निर्माण की बात कह कर चले जाते हैं। राइटर राकेश कुमार ने बताया कि अंग्रेजों से लोहा लेते समय नवजद सिंह, सुभाष सिंह, जय मंगल सिंह, सुखदेव सिंह, बुधन महतो, बंसी दास, छठ्ठू साह, बलदेव साह, सुंदर राम, परशन साह सहित 10 सपूतों ने अपने प्राण को बलि देकर शहीद हो गए थे। वही श्याम नंदन सिंह को अंग्रेजों के द्वारा झूठे आरोप में गिरफ्तार कर बक्सर जेल में डाल दिया गया था। बक्सर जेल में अन्य कैदियों के अपमान के विरोध में उन्होंने अनशन पर बैठ गये थे। इस कारण 32 दिन में उनका बक्सर जेल में मौत हो गई थी। फिर भी तरियानी छपरा में आज तक उस स्थल पर उस शहीद स्थल का विकास नहीं हो पाया है।

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