पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

स्मृति शेष:आध्यात्मिक रचनाओं के सिपाही ई. ललन प्रसाद का कृतित्व अमर रहेगा

सीतामढ़ीएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

बिहार स्टेट हाडड्रो-इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लि. के पूर्व प्रबंध निदेशक व जिले के भवदेपुर गांव निवासी ललन प्रसाद सिन्हा के निधन पर शुक्रवार को श्रद्धांजलि सभा आयाेजन किया गया। इस अवसर पर उनकी व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि ई. ललन प्रसाद सिन्हा का निधन गत 24 अप्रैल 2021 को पटना में हो गया। इनके निधन से बुद्धिजीवियों एवं साहित्यकारों ने गहरा अघात लगा है। कहा कि पहली सितंबर 1946 को सीतामढ़ी के भवदेपुर गांव में जन्मे ललन प्रसाद सिन्हा बिहार स्टेट हाइड्रोइलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन में प्रबंध-निदेशक का उत्तरदायित्व संभालते हुए अनेक निर्माण- कार्यों को पूर्ण कराया। परियोजनाओं का सफल संचालन किया। वे अर्थव्यवस्था, उद्योगों और तकनीकी से संबद्ध साहित्य के साथ-साथ संतों की वाणियों तथा आध्यात्मिक रचनाओं में विशेष अभिरुचि रखते थे। उन्हांेने श्रीकृष्ण मंदिर, मथुरा में भक्तों के लिए अपने साधनों से शौचालयों का निर्माण करवाया। इनके निजी पुस्तकालय में पुस्तक, पत्र-पत्रिकाओं आदि का अनूठा संकलन है।

यूएन डीपी कार्यक्रम के अंतर्गत इन्होंने इंग्लैंड, जर्मनी, स्विटजरलैंड, फ्रांस आदि देशों की यात्राएं की। एफआईई व आईएएसएच (इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ स्मॉल हाइड्रो), राम कृष्ण मिशन के आजीवन सदस्य रहे। इनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों ब्रह्मर्षि श्रीदेवराहा बाबा: एक अंतर्यात्रा एवं सीतामढ़ी चरित: कीर्ति, कष्ट और कलंक की कथा चर्चित रही है। लेखिका आशा प्रभात ने कहा कि ललन प्रसाद सिन्हा का निधन अपूरनीय क्षति है। डीसीएलआर ललित कुमार सिंह ने कहा कि जिले ने सच में एक नायाब रत्न खो दिया है। जिनकी क्षति पूर्ति संभव नहीं है। गीतकार गीतेश ने कहा कि जलना था दीपक को और अभी, समय से पहले बुझ गये, अपनी लेखनी से बिखेरकर प्रकाशपुंज गये...। इस अवसर पर साहित्यकार रमाशंकर मिश्र, सुरेश लाल कर्ण, मो. कमरुद्दीन नदाफ, समाजसेवी प्रमोद नील, संजय बिरख आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

खबरें और भी हैं...