मध्याह्न भोजन योजना:6 वर्ष बाद बच्चों के एमडीएम की राशि में बढ़ोतरी, गुणवत्ता में होगा सुधार

बिहारशरीफ़एक महीने पहले
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  • पहली से 5 वीं तक 5.45 रुपए व छठी से 8 वीं तक के लिए 8.17 रुपए की हुई बढ़ोतरी

केंद्र सरकार द्वारा मध्याह्न भोजन योजना के तहत दी जाने वाली राशि में बढ़ोतरी की गयी है। इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा पत्र भेजा गया है। पत्र के अनुसार अब कक्षा एक से पांच के लिए प्रति बच्चा भाजन बनाने के मद में 5 .45 रुपये व कक्षा छह से आठ के लिए 8.17 रुपये मिलेंगे। इस राशि में 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकार अपने स्तर से वहन करेगी। अब तक कक्षा एक से पांच के बच्चों के लिए 4.97 रुपये व कक्षा छह से आठ के बच्चों के लिए 7.45 रुपये दिये जाते थे। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि यह राशि एक अक्टूबर की तिथि से बढ़ायी गयी है। सरकारी स्तर से स्कूलों में चावल की आपूर्ति की जाती है। एमडीएम डीपीओ अनिल कुमार ने बताया कि अक्टूबर माह से ही वृद्धि दर पर एमडीएम राशि का भुगतान होगा।

फल और अंडा देने में हो रही है परेशानी
बच्चों को प्रत्येक दिन अलग-अलग मेन्यू के अनुसार स्कूलों में भोजन दिया जाता है। राज्य सरकार स्वयं के खर्च से सभी छात्र-छात्राओं को प्रत्येक शुक्रवार को फल एवं अंडा उपलब्ध कराने के लिए प्रति छात्र पांच रुपये खर्च करती है। विद्यालयों के एच एम ने बताया कि पांच रुपये में फल या अंडा उपलब्ध नहीं हो पाता है। फल या अंडा के लिए भी राशि बढ़ाए जाने की जरूरत है।

मध्याह्न भोजन का साप्ताहिक मेन्यू
सोमवार को चावल, मिश्रित दाल और हरि सब्जी।
मंगलवार को जीरा चावल, सोयाबीन आलू की सब्जी।
बुधवार को खिचड़ी (हरि सब्जी युक्त), चोखा, केला या मौसमी फल।
गुरुवार को चावल, मिश्रित दाल, हरी सब्जी।
शुक्रवार को पुलाव, काबुली चना या लाल चना का छोला, हरा सलाद, एक उबला हुआ अंडा या मौसमी फल।
शनिवार को खिचड़ी (हरि सब्जी युक्त)चोखा, केला या मौसमी फल।

बढ़ती मंहगाई के कारण राशि में हुई बढ़ोत्तरी
महंगाई की वजह से आम आवाम त्राहिमाम है। वहीं, सरकारी विद्यालयों में संचालित मिड-डे मील की आवंटित राशि में कई वर्षों से कोई बदलाव नहीं किया गया है। जिसके कारण एमडीएम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे थे। साथ ही महंगाई का असर मेनू पर भी पड़ रहा था। तेल-मशाला, दाल, हरी सब्जी व गैस सिलेंडर, आदि सामग्रियों की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। जिसके कारण एमडीएम की राशि में बढ़ोत्तरी की गई है। पहली से पांचवीं तक तथा छठी से आठवीं तक के बच्चों के एमडीएम के लिए अलग-अलग कन्वर्जन राशि स्कूलों को उपलब्ध कराया जाता है। जहां पर एनजीओ के माध्यम से एमडीएम परोसा जा रहा है। वहां संबंधित एनजीओ को यह राशि उपलब्ध कराई जाती है।

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