660वां सालाना उर्स:मुख्यमंत्री ने की चादरपोशी, 2.60 कराेड़ से बने दरगाह शरीफ का उद्घाटन किया

बिहारशरीफ21 दिन पहले
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बड़ी दरगाह में मखदूम-ए-जहां की मजार पर चादरपोशी करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार - Dainik Bhaskar
बड़ी दरगाह में मखदूम-ए-जहां की मजार पर चादरपोशी करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
  • सूफी हजरत बाबा शेख शर्फउद्दीन अहमद यहिया मनेरी रह. की मजार पर मेला शुरू
  • मुख्यमंत्री ने मखदूम-ए-जहां के आस्ताने पर की चादरपोशी, मांगी राज्य व देश में अमन की दुआ

विश्व प्रसिद्ध सूफी हजरत बाबा शेख शर्फ उद्दीन अहमद यहिया मनेरी रह. की बिहारशरीफ के बड़ी दरगाह मोहल्ला स्थित मजार पर शनिवार से पांच दिवसीय 660वां सालाना उर्स की शुरुआत हो गई। उर्स के पहले ही दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मखदूम-ए-जहां की मजार पर चादरपोशी कर राज्य व देश-दुनिया में तरक्की, खुशहाली, अमन-चैन और भाईचारे की दुआ मांगी। उसके बाद उन्होंने दरगाह शरीफ के निकट दो करोड़ 60 लाख की लागत से दरगाह शरीफ का उद्घाटन किया। सीएम थोड़ी देर तक वहां लगे उर्स मेले का भी नजारा देखा और कहा कि मैं हमेशा बाबा मखदूम -उल -मुल्क की मजार पर आता हूं। यहां आकर मुझे दिली सुकून मिलता है। पिछले दो वर्षों तक कोरोना काल होने के कारण नहीं आ सका था। इस बार कोरोना प्रतिबंध नही है तो आने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि मैं बाबा से यही प्रार्थना करता हूं कि हर जगह भाईचारा और प्रेम का माहौल कायम रहे। सभी लोग एक-दूसरे के साथ मिल जुलकर रहें। हर सुख-दुख में एक दूसरे के साथी बनें।

मुसाफिरखाने का भी उद्घाटन किया, बोले- यहां आने वाले लोगों को सुविधा होगी

बिहारशरीफ सूफी -संतों की धरती रही है। यहां दोनों समुदाय के संतों ने वर्षों पहले आपसी सौहार्द का संदेश दिया था। वह आज भी यहां कायम है। मखदूम साहब की ख्याति पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। वहां से निकलकर मुख्यमंत्री खानकाह-ए-मोअज्जम के लिए रवाना हो गए। उनके साथ अल्पसंख्यक मंत्री जमां खान, मजार के साहबे सज्जादनशीं (पीर साहब) सैफ उद्दीन फिरदौसी, मित्तनघाट मजार के साहबे सज्जादानशीं शमीम मोनअमी के अलावा कई अन्य लोग भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री करीब चार बजे मजार शरीफ पर पहुंचे थे। मजार शरीफ पर चादरपोशी व उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री खानकाह-ए-मोअज्जम पहुंचे और यहां चार करोड़ 85 लाख की लागत से बने मुसाफिर खाने का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इस मुसाफिर खाने का निर्माण होने से यहां आने वाले लोगों को सुविधा होगी।

पुस्तक का विमोचन
मुसाफिर खाने का उद्घाटन के बाद सीएम ने फारसी में 600 वर्ष पहले मखदूम हुसैन नौशए तौहीद रह. द्वारा लिखी गई किताब गंज-ए-लायक्फा के हिन्दी अनुवाद का विमोचन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ कई नेता व अधिकारी भी शामिल थे। मजार पर रहने वाले सूत्रों का कहना है कि चादरपोशी के बाद मुख्यमंत्री ने पीर साहेबान (सैफ उद्दीन फिरदौसी व शमीम मोनअमी) से मखदूम-उल-मुल्क के जीवन और इबादत से जुड़ी बातों के अलावा मजार शरीफ में बाहर से आने वाले जायरीन को होने वाली किसी प्रकार की दिक्कत के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि अगर बाहर से आने वाले जायरीन को किसी प्रकार की दिक्कत होती है तो उसे बताएं, दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

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