चिंताजनक:जून में सामान्य से 63 फीसदी कम बारिश 2021 में सामान्य से दोगुनी हुई थी वर्षा

हरनौतएक महीने पहले
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खेत मे खड़ा किसान - Dainik Bhaskar
खेत मे खड़ा किसान
  • चालू माह में अभी तक के कुल 28 दिनों में महज 48.2 मिमी बारिश ही हुई
  • प्रखंड में 12 हजार दो सौ हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित
  • धान की राेपनी पर पड़ रहा असर, किसान हो रहे हैं परेशान

इस वर्ष जून महीने में दो दिन ही शेष हैं। लेकिन बारिश की स्थिति बहुत ही खराब है। आसमान में काले बादल तो लगते हैं। लेकिन बिना बरसे ही छंट जाते हैं। चालू माह में अभी तक के कुल 28 दिनों में महज 48.2 मिमी बारिश ही हुई है। जो कि जून महीने में होने वाली सामान्य बारिश 127.7 मिमी से करीब 63 फीसदी कम है। इसका असर धान की रोपनी पर पड़ा है। जबकि पिछले वर्ष 2021 में जून महीने के दौरान ही कुल 274.2 मिमी बारिश हुई थी। यह सामान्य बारिश से दोगुनी से भी अधिक थी। जबकि इस जून किसानों का समय आसमान निहारते ही बीत गया। प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी साकेत कुमार ने बताया कि कृषि कार्य के लिहाज से कम बारिश हुई है। किसानों का कहना है इसका खेती पर असर पड़ना तय है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी विनय कुमार ने बताया कि प्रखंड में 12 हजार दो सौ हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित है। उसके अनुरुप करीब 90 फीसदी में बिचड़ा तैयारी करने का काम चालू समय तक प्रगति में है। प्रखंड क्षेत्र के लिए निर्धारित की गई लक्ष्य की प्राप्ति कर ली जाएगी।

कम अवधि वाले धान की होती है खेती : मोबारकपुर के किसान त्रिवेणी कुमार बताते हैं कि उनके इलाके में खेत में पानी होने के बाद देर से निकलता है। क्योंकि यह पंचाने नदी के प्रभाव वाला इलाका है। इलाके के किसानों के लिए दोनों ही स्थिति नुकसानदेह है। पहले पानी की कमी से बिचड़ा तैयार होने में देरी होती है। बाद में बाढ़ की आशंका को लेकर कम अवधि वाले धान की खेती ही कर पाते हैं। इससे नुकसान कम होता है। जबकि परिवार का पेट भरने के लिए कुछ महीनों का अनाज पैदा हो जाता है।

अत्यधिक गर्मी के कारण नही गिरे बीज
पोरई के विन्देश्वर दास सहित कई अन्य किसानों ने बताया कि पहले रोहण नक्षत्र में धान के बीज अधिकांशत : गिरा दिए जाते थे। इससे आर्द्रा नक्षत्र में रोपाई का काम भी शुरु हो जाती थी। लेकिन इस वर्ष रोहण नक्षत्र में भीषण गर्मी पड़ी है। वर्षा के अभाव में बीज नहीं गिराए गए। यदि बीज गिरा दिए जाते तो अत्यधिक गर्मी से बिचड़े लाल होकर खराब हो जाते। इससे उनकी उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ती। यही कारण है कि इस बार मृगशिरा नक्षत्र में ही बीज गिराये जा सके हैं। इसके बाद बिचड़ा तैयार होने में 20 से 21 दिन का समय लग जाता हैं। इससे अब जुलाई के प्रथम सप्ताह में रोपाई का काम शुरु होने की संभावना है।

चल रहा जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम
बता दें कि अल्प या अतिवृष्टि की स्थिति को लेकर ही प्रखंड के पांच गांवों में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस संबंध में बारलॉग इंस्टीट्यूट ऑफ साऊथ एशिया(बिसा) के तकनीकी सहायक संजीव कुमार बताते हैं कि विपरीत मौसम को लेकर ही प्रखंड में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। इसके बेहतर परिणाम भी देखने को मिले हैं। मौसम की स्थिति को देखते हुए ही इस वर्ष धान की सीधी बुवाई से खेती का लक्ष्य रखा गया है। साढ़े चार से पांच सौ एकड़ में इसी विधि से धान की खेती हो रही है। इस विधि से खेती में 20 से 25 फीसदी पानी व 25 से 30 श्रमिकों के श्रम की बचत होती है। इसमें देर होने पर शेष रकवे में श्रीविधि से धान की खेती होगी। उन्होंने बताया कि यह विधि किसानों को मौसम के कारण होने वाले नुकसान से बचाता है। किसान भी इस विधि के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।

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