सुखद:मेसकौर के लिए वरदान साबित हुआ भूकंप, पेयजल की समस्या का हुआ समाधान

नवादाएक महीने पहले
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भूकंप आपदा है। इसके अनंत नुकसान भी हैं। लेकिन कभी कभी वरदान भी साबित होता है। 2015 में तेज भूकंप आया था। इसने नवादा जिले के एक बड़े संकट को आंशिक ही सही लेकिन कम कर दिया है। दरअसल, नवादा जिले के मेसकौर प्रखंड को राज्य का दूसरा सबसे सूखा प्रखंड कहा जाता है। जितने बोरिंग होते थे उनमें से अधिकतर फेल हो जाते थे। कहीं वाटर लेवल मिलता ही नहीं था तो कहीं बहुत गहराई में मिलता था। लेकिन बीते चार-पांच सालों में स्थितियां सुधरी है। जहां ग्राउंड वॉटर नहीं था वहां भी ग्रांड वॉटर का भंडार में रहा है नए बोरिंग हो रहे हैं।

भले ही या जल भंडार कमजोर है और लगातार कुछ घंटे चलने के बाद बोरिंग पानी छोड़ रहा है लेकिन जल भंडार का बनना सुखद संकेत है। इतना ही नहीं इस सबसे सूखे प्रखंड में वाटर लेवल जिले की अपेक्षा ऊपर में। अभी जिले का औसत जलस्तर करीब 27 फीट नीचे है तो मेसकौर प्रखंड का औसत ग्राउंड वाटर लेवल करीब 25 फीट पर है। यह बदलाव 2015 -16 के बाद हुआ है। इससे यह दावा मजबूत हो रहा है कि करीब 5 साल साल पहले आए भूकंप के तेज झटकों के असर से ऐसा हुआ है।

एक्सपर्ट्स इसके पीछे दलील देते हुए बताते हैं कि देश दुनिया में कई ऐसे क्षेत्र है जहां वाटर लेवल एकदम नहीं है वहां विस्फोट का सहारा लिया जाता है। यह प्रयास सफल भी होते हैं विफल भी होते हैं। ऐसे जगहों पर भीषण विस्फोट कराकर चट्टानों को हिलाने का प्रयास किया जाता है ताकि हलचल से चट्टाने क्रैक हो और अगर कहीं जलधारा बंद है तो वह खुल जाए। भूकंप से भी ऐसा ही संभव है।

भूकंप के झटके से जो हलचल होती है उससे चट्टानों के क्रैक होने की संभावना बढ़ जाती है जिसके चलते नई जलधारा निकल जाना कोई बड़ी बात नहीं है। धरती के अंदर हलचल कंपन के चलते ग्राउंड वाटर लेवल के प्रभावित होने के और भी तथ्य हैं। पीएचईडी के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार प्रदीप ने बताया कि बगल में ही पहाड़ पर पत्थर खनन के लिए जबरदस्त विस्फोट होता है। संभव है कि विस्फोट के कारण वाटर स्टोर बंद हो गया हो। मेसकौर बिहार का दूसरा ऐसा प्रखंड रहा है, जहां पेयजल की गंभीर समस्या रही है । पथरीली जगह रहने के कारण बोरिंग भी फेल हो जाता रहा है ।

ऐसे में बाहर से पेयजल आपूर्ति की जाती रही है लेकिन इस विषम परिस्थिति के बीच भूजल स्तर में सुधार से पूरे प्रखंड की तो नहीं पेयजल की समस्या खत्म तो नहीं हुई है लेकिन मामूली सुधार देखने को मिलने लगा है । यह क्षेत्र के लोगों के लिए अच्छी खबर है। हालांकि अभी भी कई ऐसे गांव और पंचायत हैं जहां पाने की गंभीर समस्या बनी हुई है।

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