खिला चेहरा:लहलहा

नवादा9 दिन पहले
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खेतों में लहलहाती मूंग की फसल। - Dainik Bhaskar
खेतों में लहलहाती मूंग की फसल।
  • फरवरी में भारी ओलावृष्टि व बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया था

नौकरी पेशा में जैसे लोगों को तय वेतन के अतिरिक्त बोनस मिलता है किसानों के लिए वैसे ही मूंग की खेती बता और बोनस काम करती है। इस बार मौसम ठीक है लिहाजा मूंग की खेती लहलहा रही है। इस साल फरवरी माह में हुई भारी ओलावृष्टि और असामयिक बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया और अन्य सालों की अपेक्षा काफी कम उपज हुई है। इसकी भरपाई किसानों ने हार नहीं मानी और सही समय पर मूंग की फसल लगा दी। इस समय किसानों के खेतों में मूंग की फसल काफी अच्छी है।

जिले में इस बार बड़े पैमाने पर मूंग की खेती हो रही है। 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी खेतों में मूंग की फसल लहलहा रही है। किसानों की माने तो यदि सब कुछ सही रहा तो इस बार मूंग की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि रबी फसल में हुए क्षति की भरपाई मूंग से होने की उम्मीद है। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि मूंग की खेती में किसानों को पूंजी व मेहनत कम एवं मुनाफा अधिक होता है। परती जमीन पर मूंग की खेती कर किसान देहरा लाभ ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे खेत की उर्वरा शक्ति एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। किसानों को मूंग की अच्छी फसल हो जाती है।

कम दिन में अधिक मूंग से फायदा
मूंग की फसल 40 से 50 दिनों में तैयार हो जाता है। इसके पौधों की जड़े एवं उससे गिरे पत्ते खेत को मजबूत करते हैं। मूंग का फल तोड़ने के बाद पत्ते व पौधे को खेत में सड़ा देने से खाद बनकर खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। मूंग की फसल के बाद इसी खेत में खरीफ फसल की बुआई की जाती है। इससे किसानों को अच्छी उपज के साथ दोहरा लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि जिले के सभी किसानों को रबी फसल के बाद अपने खेतों में मूंग की बुआई करनी चाहिए। इससे खेतों की उर्वरा शक्ति बनी रहती है।

जिले के किसानों को तिहरा लाभ मिला
जिले में इस वर्ष किसानों ने अब तक 5 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मूंग की बोवनी कर चुके हैं। अभी और मूंग लगना बाकी है। जिले में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक किसानों ने ग्रीष्म कालीन मूंग खेतों में लगाए हैं। किसानाें ने बताया कि जिनके पास पानी की पर्याप्त व्यवस्था रहती है। वे गेहूं और चने की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में मूंग की फसल ले रहे हैं। यह फसल 50 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है। इससे किसानों को उपज के बेहतर दाम मिलते हैं। सिंचाई के साधनों का विस्तार होने के बाद किसान अब तीन फसल लेने लगे हैं।

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