मानसून की दस्तक:दस दिन लेट नवादा पहुंचा प्री मानसून भी कमजोर 15 के बाद जिले में होगी मानसून की दस्तक

नवादाएक महीने पहले
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  • हल्की बारिश से मूंग की खेती को मिला टॉनिक, खरीफ के लिए बन गई नमी
  • खरीफ फसल को जैविक खाद देने के लिए खेत में लगाएं ढैचा की फसल

पिछले 2 सालों से जिले में प्री मानसून समय पर या समय से पहले आ रहा था लेकिन इस बार लेट हो रहा है। पिछले 3 दिनों में प्री मानसून का हल्का असर देखने को मिला है और जहां तहां हल्की बारिश हो रही है। मंगलवार की रात में भी जिले के कई प्रखंडों में झमाझम बारिश हुई लेकिन टिकी नहीं। सुबह होते-होते मौसम साफ हो गया। दोपहर बाद फिर आसमान में बादल छा गए। मौसम मैं यह आंशिक बदलाव कई दिनों से चल रहा है। कभी किसी प्रखंड में तो कभी किसी प्रकरण में हल्की फुल्की बारिश हो रही है। अब इतनी बारिश तो हो ही गई है कि किसान खरीफ फसल की तैयारी शुरू कर सकें। इस हल्की बारिश से मूंग की फसल को भी टॉनिक मिला है। पिछले 3 दिनों से रात में ही मौसम का मिजाज बदलता है बाकी दिल में मौसम पूरी तरह साफ रहता है। हालांकि अगल बगल के जिलों में अगले 1 सप्ताह तक प्री मानसून के हल केसर की संभावना है लिहाजा कभी-कभार बारिश और तेज हवा से इनकार नहीं किया जा सकता।

खरीफ फसल की तैयारी शुरू करें किसान
कृषि विज्ञान केंद्र ने एडवाइजरी जारी कर किसानों को सचेत किया है। जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि अगले 1 सप्ताह तक आंशिक बादल छाने की संभावना है। इसके चलते कहीं बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि बारिश जैसा कोई अलर्ट नहीं है। कृषि मौसम वैज्ञानिक रोशन कुमार ने बताया रबी फसल की कटाई और थ्रेसिंग हो चुकी है और खरीफ फसल की तैयारी शुरू करने का वक्त आ गया है। खरीफ फसल के लिए जैविक खाद बनाने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। इसके लिए किसान ढैचा की खेती करें। खेत में नमी बन गई हो तो खरीफ फसल की तैयारी के लिए जुताई कर सकते हैं।1 एकड़ में इसके 15 से 16 किलो बीज काफी है।

तय समय पर मानसून के आने की संभावना
कृषि मौसम वैज्ञानिक रोशन कुमार ने बताया कि अभी जो हल्की फुल्की बारिश हो रही है वह प्री मानसून का असर है। उन्होंने बताया कि प्री मानसून लेट आया है। अगले कुछ दिनों तक प्री मासून बारिश होने की संभावना है। आम तौर पर 26 से 27 मई के आसपास से लेकर 14 जून तक प्री मानसून बारिश होती है। इसके बाद मानसून की दस्तक होती है।

मिट्टी और मवेशी की देखभाल जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ रंजन कुमार और रोशन कुमार ने बताया कि रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो ं की गहरी जुताई कर खेत को खुला छोड़ दें ताकि सुर्य की तेज धुप मिट्टी में छिपे कीड़े के अण्डे, प्युपा एवं घास के बीजों को नष्ट कर दें । दुधारू पशु को धुप व लू से बचान के लिए पशुओं को छायेदार स्थान पर रखे एवं शुद्ध पानी पीने के लिए दिन में 3 से 4 बार दें ।

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