लापरवाही:सरकारी दर पर गेहूं खरीदारी सुपर फ्लॉप, 35 दिन में सिर्फ एक किसान ने बेचा 50 क्विंटल गेहूं

नवादाएक महीने पहले
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रखा हुआ धान। - Dainik Bhaskar
रखा हुआ धान।
  • बाजार में सरकारी दर से 200 रुपया ज्यादा रेट में बिक रहा गेहूं, इसलिए फ्लॉप हो गई सरकारी खरीद

सरकारी स्तर पर गेहूं की खरीदारी करने के लिए 77 गेहूं क्रय केंद्र चयनित किए गए लेकिन 35 दिन बीत जाने के बाद भी 76 क्रय केंद्रों पर एक छटाक गेहूं नहीं खरीदा जा सका। सवा महीने में सिर्फ 1 पैक्स ने हीं गेहूं खरीदा है वह भी एक किसान का। गेहूं की खरीदारी समाप्त होने में सिर्फ 5 दिन बाकी है लेकिन अब तक सिर्फ 5 एमटी 50 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। जबकि जिले में इस बार 28,000 एमटी यानि 2 लाख 80 क्विंटल गेहूं खरीदा जाना था। ऐसे में यह साफ है कि लक्ष्य का 5 फ़ीसदी गेहूं भी खरीदा जाना मुश्किल है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि गेंहू खरीद के लिए निर्धारित सरकारी दर से 100-200 रुपया प्रति क्विंटल अधिक रेट बाजार में मिल रहा है। इसके चलते सरकारी स्तर पर गेहूं खरीद फ्लॉप साबित हो रही है। हर बार की तरह इस बार भी शुरुआती दिनों में गेहूं की खरीद में नहीं के बराबर हो रही है। गेहूं खरीदने के लिए जिले के 78 पैसों का चयन हुआ है लेकिन 77 पैक्सों में खरीद शुरू नहीं हो पाई है।

खरीदारी में सिर्फ 5 दिन बाकी: 78 में से 77 पैक्सों ने नहीं खरीदा एक ग्राम भी गेहूं

रैयती किसान 150 और बटाईदार 50 क्विंटल बेच सकेंगे
विभागीय अधिकारी ने बताया कि जिले के निबंधित किसान बिजली विभाग के पोर्टल पर भूमि से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को दर्ज कराने के बाद भी गेहूं बेच सकेंगे। तय नियमो के अनुसार जिस किसान की अपनी रैयती जमीन है वह अधिकतम 150 क्विंटल गेहूं भेज सकते हैं लेकिन जिनकी अपनी खेत नहीं है और बटाई खेती करते हैं वैसे गैर रैयत किसान 50 क्विंटल गेहूं बेच सकेंगे।

धान में तेजी गेहूं में सुस्ती: गेहूं की खरीद को लेकर पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था। जबकि धान की खरीदारी के दौरान पैक्स और किसान दोनों की दिलचस्पी बढ़ी होती है। इस साल करीब दो लाख मैट्रिक टन धान की खरीदारी का कठिन लक्ष्य था फिर भी प्राप्त हो गया । लेकिन बारी गेहूं खरीदारी की आई तो हालत खराब है।

31 मई तक है समय
बता दें कि पूरे राज्य के अनुसार नवादा जिले में भी 20 अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू की गई है। गेहूं खरीदारी का कार्य 31 मई तक चलेगा। निर्धारित तिथि के भीतर जिले के इच्छुक किसान अपने गेहूं की बिक्री समर्थन मोड़ पर कर पाएंगे। गेहूं खरीद के साथ ही किसानों को जल्दी राशि भुगतान की व्यवस्था की गई है। इसके तहत किसानों को गेहूं बेचने 48 घंटे में भुगतान करने का प्रावधान किया गया है। किसानों को गेहूं का भुगतान उनके खाते में किया जाएगा।

सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने से कतरा रहे किसान
दरअसल गेहूं का बाजार मूल्य हर बार सरकारी समर्थन मूल्य से या तो अधिक होता है या इसके आस पास होता है। ऊपर से पैक्स में ले जाकर गेहूं बेचने के दौरान होने वाली कई परेशानियां अलग से। इसके चलते सरकारी दर पर गेहूं बेचने से कतराते हैं। यही कारण है कि जिले के किसान सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने में दिलचस्पी कम ले रहे हैं। पोर्टल के अनुसार रविवार तक सिर्फ 63 लोगों ने गेहूं बेचने के लिए अपना आवेदन दिया है।
40 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ी गेहूं की कीमत भी नाकाफी
गेहूं के समर्थन मूल्य में इस बार 40 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। पिछले सीजन में 1975 रुपया प्रति क्विंटल की दर पर खरीद होती थी लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर 2015 रुपया प्रति क्विंटल कर दिया गया है। यानि पिछले साल की तुलना में इस साल गेहूं के समर्थन मूल्य में 40 रूपये प्रति कुंतल का वृद्धि की गई है। लेकिन यह वृद्धि भी बाजार मूल्य के सामने नाकाफी साबित हो रही है।​​​​​​​

सिर्फ पहले दिन खरीद, फिर खरीददारी बंद
पहले दिन सिर्फ 1 पैक्स में गेहूं की खरीदारी शुरू हो पाई और इसके बाद से कहीं खरीद नहीं हो पाई। सहकारिता पोर्टल के अनुसार जिले में सिर्फ एक क्रय केंद्र वारिसलीगंज के ठेरा पैक्स में आधा एमटी ( 0.500 एमटी) गेहूं की खरीद हो पाई। बाकी कहीं बोहनी भी नहीं हुई। बाकी के पैक्सों में तो ना क्रय केंद्र खुला ना ही कोई किसान अपना गेहूं बेचने के लिए पहुंचा। एकमात्र पैक्स मे जो खरीदारी हुई है वह वारिसलीगंज प्रखंड के ठेरा पैक्स में हुई है जहां एक किसान से गेहूं खरीदारी कर अधिप्राप्ति का शुभारंभ किया गया था।

जिला सहकारिता पदाधिकारी ने बताया कि जिले में गेहूं अधिप्राप्ति का कार्य शुरू किया गया है लेकिन लक्ष्य से काफी पीछे है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि इस बार बाजार में गेहूं का भाव तेज है। इसलिए किसान बाजार में ही गेहूं खरीद रहे हैं। सरकारी स्तर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि एमएसपी पर खरीदारी की जा रही है। गेहूं की कीमत भी पिछले साल के अनुपात में बढ़ाई गई है। इसके बावजूद खरीददारी तेज नहीं हो पा रही है।

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