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मजिस्ट्रेट और पुलिस की मौजूदगी में बवाल:कोरोना का प्रोटोकॉल आम लोगों ने तोड़ा तो 28 नामजद, 1,000 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज

पटना10 महीने पहले
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खप्पर पूजा के दौरान उमड़ भीड़। - Dainik Bhaskar
खप्पर पूजा के दौरान उमड़ भीड़।

शुक्रवार को पटना में मजिस्ट्रेट और पुलिस फोर्स की मौजूदगी में जमकर बवाल हुआ। मना करने के बाद भी दबंगों ने भीड़ जुटाया और जबरन खप्पर पूजा की। कोरोन के प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए जुलूस निकाला, जिससे अशांति का माहौल तैयार हो गया। भीड़ को काबू करने में पुलिस और प्रशासन का पसीना छूट गया। इस मामले में मनमानी करने वाले 28 लोगों पर नामजद FIR किया गया है, जबकि 1,000 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इनकी गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।

विधि व्यवस्था के साथ कोराेना का खतरा

फुलवारी शरीफ में शुक्रवार को की गई पुलिस की बड़ी कार्रवाई को लेकर कहना है कि भीड़ से विधि व्यवस्था और कोरोना का बड़ा खतरा था। ऐसे में पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी है। पुलिस ने विधि व्यवस्था, कोविड मानक, महामारी एक्ट, लाउडस्पीकर एक्ट के उल्लंघन में फुलवारी शरीफ थाना में 28 के खिलाफ नामजद और 1000 अज्ञात लाेगों पर कार्रवाई की है। पुलिस का कहना है कि मनाही के बाद भी पूजा करने में भाग लेने के कारण कोरोना व विधि व्यवस्था का खतरा था। इस खतरे को लेकर लापरवाही और अशांंति फैलाने वालों पर कार्रवाई की गई है।

कोरोना को लेकर पाबंदी तोड़ी

पुलिस प्रशासन का कहना है कि कोविड-19 को देखते हुए इस वर्ष फुलवारी शरीफ प्रखंड के पास स्थित दुर्गा मंदिर पर खप्पर पूजा का आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया गया था। इस संबंध में पूजा समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर पूरी बात की जानकारी दी गई थी, लेकिन इसके बाद भी पूजा समिति के सदस्यों द्वारा दुर्गा मंदिर पर भीड़ भाड़ एकत्रित किया गया। हजारों की संख्या में जुलूस के रूप में लोग मंदिर के पास जमा होकर नारा लगाने लगे तथा खप्पर लेकर जुलूस मंदिर से टमटम पड़ाव ,मस्जिद चौराहा, पेठिया बाजार होते हुए पुनः वापस मंदिर प्रांगण में आ गए।

पुलिस का दावा, चौकसी से कायम हुई शांति

पुलिस प्रशासन का कहना है कि मंदिर पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी द्वारा पूजा समिति के सदस्यों से भीड़ नहीं लगाने के साथ जगह खाली कराने का अनुरोध किया गया, लेकिन इसे भीड़ ने पूरी तरह से नजर अंदाज कर दिया। प्रशासन केे निर्देश को अनसुना कर लाउडस्पीकर के माध्यम से भीड़ को और उत्तेजित किया गया। इससे देखते ही देखते माहौल पूरी तरह से खराब हो गया और बड़ी घटना आशंका जताई जाने लगी। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की भीड़ ने एक न सुनी और जमकर बवाल काटा। इस दौरान पुलिस से कई बार झड़प भी हुई लेकिन सैकड़ों की संख्या में जमा भी के आगे प्रशासन बेबस दिखा।

मजिस्ट्रेट ने दर्ज कराया मुकदमा

त्योहार को लेकर दंडाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त अंचलाधिकारी फुलवारी शरीफ नंदकिशोर प्रसाद निराला ने फुलवारी शरीफ के थाना प्रभारी को आवेदन देकर 28 नामित व्यक्तियों तथा अन्य 1000 अज्ञात व्यक्तियों प्राथमिकी दर्ज कराया है। फुलवारी शरीफ थाना की पुलिस ने केस संख्या 681/21 दर्ज किया है। आराेपियों के खिलाफ IPC की धारा के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है7

काश राजनीतिक कार्यक्रमों पर ऐसे रखी जाती नजर

यह बिहार है, यहां बस नेता ही नियम तोड़ सकते हैं। आम आदमी ने नियम तोड़ा तो बड़ी से बड़ी कार्रवाई तय है। बिहार का यही इतिहास रहा है। कोरोना की पहली लहर के बाद विधानसभा चुनाव से लेकर दूसरी लहर के बाद भी नेताओं ने प्रोटोकॉल का जमकर मजाक उड़ाया।

हाल ही में चिराग पासवान से लेकर पशुपति पारस और तेजस्वी, तेज प्रताप, ललन सिंह सहित कई नेताओं के कार्यक्रम में कोरोना की गाइडलाइन टूटी लेकिन एक भी कार्रवाई नही की गई। बिना अनुमति चिराग पासवान ने तो कई जिलों में बड़े कार्यक्रम पूरी कर लिए लेकिन कोई सवाल तक नहीं किया गया। शुक्रवार को फुलवारी में हुए बवाल में नेता शामिल होते तो शयद इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती।

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