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बिहार के गांवों से ग्राउंड रिपोर्ट:पटना से 15 KM की दूरी पर भी सरकार की हनक नहीं; बंद रहता है PHC, लोगों को सर्दी-बुखार तो हो रहा, घर में ही ठीक भी हो रहे

पटना5 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ताला बंद रहता है।

फुलवारी शरीफ प्रखंड में है गोनपुरा पंचायत। राजधानी पटना, जहां सरकार बैठती है, वहां से महज 15 किमी की दूरी पर है। भास्कर ने इस पंचायत में स्थित एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र का रियलिटी चेक किया तो पाया कि सरकार की कोई हनक कोरोना काल में भी यहां नहीं है।

सुंदर स्वास्थ्य केंद्र किस काम का, जब यह खुलता ही नहीं
गोनपुरा पंचायत में 13 गांव और 15 वार्ड हैं और एक स्वास्थ्य केंद्र। वह भी बंद पड़ा है। खूबसूरत भवन है। खूबसूरत रंगरोगन है। खूबसूरती के साथ आयुष्मान भारत भी इस पर लिखा है। लेकिन गेट पर ताला लटका हुआ है।

स्थानीय निवासी राहुल कुमार ने बताया कि यह स्वास्थ्य केंद्र सप्ताह में मुश्किल से एक दिन खुलता है। कोरोना जांच की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। वैक्सीन के लिए एक बार गांव में कैंप लगा था। गांव के लोगों को बीमार होने पर सात किमी दूर फुलवारी के स्वास्थ्य केंद्र पर जाना पड़ता है। पटना AIIMS चार-पांच किमी दूर है, लोग वहां भी जाते हैं।

कोरोना जांच यहां बहुत जरूरी है
गांव के ही एक अन्य युवा बताते हैं कि स्वास्थ्य केंद्र कभी-कभी ही खुलता है। गांव में कोरोना का बहुत असर नहीं है, लेकिन वे इस पर भी जोर देते हैं कि जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। तभी पता चल पाएगा कि कोरोना की स्थिति कैसी है। गांव में बाहर के लोग भी अच्छी संख्या में आए हैं, सब की जांच जरूरी है।

पंचायत तक सड़क की स्थिति भी बहुत खराब है।
पंचायत तक सड़क की स्थिति भी बहुत खराब है।

सड़क की स्थिति काफी खराब
पटना से अनीसाबाद बाल्मीचक मोड़ होते हुए गोनपुरा पंचायत पहुंचने पर रास्ते में सड़क की भी बहुत खराब स्थिति है। ब्रह्मपुर के पास नमामि गंगे योजना के तहत सड़क के नीचे सीवरेज बनाया जा रहा है। इस कारण पिछले डेढ़-दो साल से सड़क की स्थिति बद से बदतर करके छोड़ दी गई है। गोनपुरा हेल्थ सेंटर तक पहुंचने वाली सड़क की स्थिति भी खराब है।

मुखिया की शिकायत का भी असर नहीं
भास्कर ने गोनपुरा पंचायत की मुखिया आभा देवी से बात की। उन्होंने बताया कि पहले यह स्वास्थ्य केंद्र हर सोमवार को खुलता था, लेकिन अब वह भी कोरोना के समय नहीं खुल रहा है। इसकी शिकायत उन्होंने फुलवारी अस्पताल में भी लिखित रुप से की, लेकिन इस पर कोई सुनवाई अफसरों ने नहीं की।

वह बताती हैं कि लोगों को सर्दी-बुखार इस मौसम में बहुत हो रहा है, लेकिन कोरोना जांच की व्यवस्था नहीं होने से घर पर ही ठीक हो रहे हैं। कुछ लोगों की मौत भी हुई है। कैंप लगाकर जल्द से जल्द वैक्सीन दी जाए तो बेहतर होगा। लेकिन 13 गांव और 15 वार्ड पर बना एक स्वास्थ्य केंद्र ही नहीं खोला जा रहा तो बाकी अपेक्षा क्या करें? किससे करें?

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